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समाजवादी स्वास्थ्य सेवा की एंबुलेंस ‘बीमार’

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बांदा। समाजवादी स्वास्थ्य सेवा की एंबुलेंस की भी वही हालत है जो आज कल के समाजवाद की है। प्रदेश सरकार द्वारा जोर-शोर से शुरू की गई ‘108’ एंबुलेंस सेवा दो वर्षों में ही खुद बीमार हो गई। गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई यह सेवा कुछ लोगों के लिए ‘मेवा’ बन गई। एंबुलेंस का एसी खराब है। स्टैंड टूट जाने से ऑक्सीजन सिलेंडर नदारद है। कई महीनों से एंबुलेंस मेें जीवन रक्षक और दर्द निवारक दवाएं नदारद हैं। एंबुलेंस में लाए जाने वाले मरीजों को फौरीतौर पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल पा रहा है। ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में इस एंबुलेंस सेवा की हकीकत सामने आई है।
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एसी खराब, सिलेंडर नदारद, तड़पता रहा मरीज
केस-1: अमलोहरा (कमासिन) गांव निवासी प्रमोद (25) के पेट में सोमवार को तेज दर्द उठा। उसके बाबा गलुआ ने कमासिन पीएचसी की ‘108’ एंबुलेंस को फोन किया। एक घंटे बाद एंबुलेंस आई। जिला अस्पताल तक लाने में साढे़ तीन घंटे लग गए। प्रमोद रास्ते भर दर्द से कराहता रहा। एंबुलेंस मेें उसे कोई उपचार नहीं मिला। एसी खराब और ऑक्सीजन सिलेंडर नदारद था। एंबुलेंस के ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन) दिनेश चंद्र चौधरी ने बताया कि एंबुलेंस में उपलब्ध रहने वाली जरूरी 17 दवाओं में सिर्फ 2-4 ही बची हैं। स्ट्रेचर स्टैंड खड़ा नहीं हो पाता।
दावा 20 मिनट का, आती है घंटों बाद
केस-2: चुनकाई पुरवा (कालिंजर) की बेटा देवी पत्नी सुरेंद्र को सोमवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई। परिजन उसे नरैनी लाए। यहां से सुबह 9:06 बजे ‘108’ एंबुलेंस को कॉल किया गया। दावा तो किया जाता है कि 20 मिनट में एंबुलेंस पहुंचेगी। लेकिन पौन घंटे बाद एंबुलेंस आई। साढ़े 11 बजे महिला जिला अस्पताल पहुंचाया। एंबुलेंस में कोई प्राथमिक उपचार या राहत नहीं मिली। इस एंबुलेंस के पायलट और ईएमटी का कहना था कि दवाएं पिछले साल मिली थीं। आधी से ज्यादा खत्म हो चुकी हैं। दवाओं की डिमांड पर कोई सुनने वाला नहीं है।
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तीमारदारों को बता डाला दवा चोर
केस-3: डिगुरा (अतर्रा) की माया (30) पत्नी राजेश को डायरिया हो जाने पर नरैनी सीएचसी से जिला अस्पताल रिफर कर दिया गया। वहां से ‘108’ एंबुलेंस को कॉल किया गया। करीब 15 किलोमीटर दूर और अच्छी हालत की सड़क के बावजूद एंबुलेंस को अतर्रा से नरैनी आने में एक घंटा लगा। एंबुलेंस का स्ट्रेचर खराब होने से परिजनों मरीज को हाथों में उठा कर लिटाया-बिठाया। एंबुलेंस के ईएमटी वेद प्रकाश और पायलट करन सिंह का कहना था कि पेन किलर, स्प्रे और कई जरूरी दवाएं खत्म हो चुकी हैं। पिछले साल के बाद दवाएं नहीं मिली। दोनों कर्मियों ने मरीज के तीमारदारों पर भी ठीकरा फोड़ा कि बाक्स से दवाएं आदि चोरी कर लेेते हैं।
एंबुलेंस में ये होना चाहिए
बर्न स्प्रे, पेन किलर स्प्रे, बीटाडीन लोशन, काटन, जीवन रक्षक इंजेक्शन, पेन रिलीव इंजेक्शन, ग्लब्स, मास्क, बीगो, ग्लूकोज, मेट्रोजिल समेत 17 तरह की दवाएं।
बांदा में 10 स्थानों पर हैं एंबुलेंस
जिला अस्पताल, जसपुरा, तिंदवारी, बबेरू, कमासिन, बिसंडा, महुआ, नरैनी, बड़ोखर खुर्द और अतर्रा।
समाजवादी स्वास्थ्य सेवा 108 एंबुलेंस का पूरा संचालन लखनऊ से होता है। एक प्राइवेट कंपनी यह काम देख रही है। दवाएं भी लखनऊ से आती हैं। जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की कुछ खास भागीदारी इसमें नहीं होती। अलबत्ता एंबुलेंस सुपरवाइजर अगर कभी किसी जरूरी दवा की मांग करते हैं तो उपलब्ध करा दी जाती है। - मुख्य चिकित्साधिकारी कैप्टन डा.आरके सिंह का
पिछले साल शासन ने सभी 108 एंबुलेंस के लिए दवाएं उपलब्ध कराईं थीं। हो सकता है कुछ दवाएं खत्म हो चुकी हों। लेकिन एंबुलेंस स्टाफ ने उन्हें इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी है। एंबुलेंस में ज्यादातर प्राथमिक उपचार की ही दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।- मोहम्मद सादिक खां, प्रभारी बांदा-चित्रकूट
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