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राजेंद्र की बेबाक टिप्पणी से घबराते थे हिंदूवादी

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बांदा। आधुनिक हिंदी कवि और वरिष्ठ कथाकार राजेंद्र यादव के निधन पर कवियों और साहित्यकारों ने शोक व्यक्त किया है। जनवादी लेखक संघ और केदार शोध पीठ न्यास तथा प्रगतिशील लेखक संघ ने श्रद्धांजलि दी। कहा कि उनकी बेबाक टिप्पणियों से हिंदूवादी लोग घबराते थे।
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प्रो. रामगोपाल गुप्त ने राजेंद्र के निधन को हिंदी साहित्य और प्रगतिशील सोच की अपूर्णीय क्षति बताया। योगेश श्रीवास्तव ने कहा कि उनकी प्रगतिशील बेजोड़ थी। मयंक खरे ने उन्हें पारदर्शी मूल्यों का पक्षधर कहा। जयकांत शर्मा ने उन्हें दबे-कुचले लेखन को हंस के माध्यम से सामने लाने वाला बताया। चंद्रपाल कश्यप ने साहित्यिक और वैचारिक मूल्य वाला बताया। रामचंद्र सरस ने कहा कि वह हमेशा याद किए जाएंगे। नरेंद्र पुंडरीक ने कहा कि राजेंद्र यादव ने लोगों को तमाम खतरों से चेताया। उनकी बेबाक और प्रखर टिप्पणी से हिंदूवादी घबराते थे। न्यास अध्यक्ष महेश अग्रवाल ने सभी का आभार जताया।
उधर, जनवादी लेखक संघ की शोक सभा में राज्य प्रभारी और डीसीडीएफ अध्यक्ष सुधीर सिंह ने कहा कि राजेंद्र की उपस्थिति कहानी विधा का पर्याय बन गई थी। उन्होंने हिंदी कहानी को आधुनिक भाव-बोध से लैस करके लेखकीय हस्तक्षेप की साहसपूर्ण कला को विकसित किया। कवि केशव तिवारी ने कहा कि राजेंद्र जनवादी लेखक संघ की स्थापना से ही उसके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आजीवन रहे। उन्होंने नई कहानी का भाषित विधान रचा। गोपाल गोयल ने उनके उपन्यास ‘सारा आकाश’ को हिंदी का श्रेष्ठ उपन्यास बताया। सचिव उमाशंकर परमार ने भी श्रद्धांजलि दी।
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