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पुलिस दर्ज नहीं करती पीड़ितों का मुकदमा

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बांदा। स्वयंसेवी संस्था डायनमिक एक्शन ग्रुप और राष्ट्रीय न्याय आंदोलन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दलित पीड़ित सम्मेलन में कहा गया कि दलितों पर दबंगों के जुल्म जारी हैं। पुलिस पर आरोप लगाया कि पीड़ितों के मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते।
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रविवार को आयोजित सम्मेलन में बताया गया कि संगठन कई राज्यों में अध्ययन कर रहा है। इस मौके पर दलित वर्ग के 21 पीड़ितों ने भाग लिया। सदस्यों ने कहा कि आरोप पत्र समय से दाखिल नहीं किए जाते। न ही समय पर सभी पीड़ितों को मुआवजा मिलता है। समझौते के लिए धमकियां दी जाती हैं। 60 फीसदी मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं। पिछले कई वर्षों के दलित उत्पीड़न संबंधी 24 मामले सम्मेलन में पेश किए गए। इनमें 12 बलात्कार के थे। चार मुकदमे छेड़छाड़ संबंधी थे।
सम्मेलन में एक्शन ग्रुप प्रदेश संयोजक रामकुमार, राष्ट्रीय दलित न्याय आंदोलन दिल्ली की अविरानी, अधिवक्ता राहुल सिंह, राज्य संयोजक रामदुलार, बुंदेलखंड प्रभारी देवीदयाल, प्रीति अनामिक, बाबूलाल कुशवाहा, रामशरण राठौर, राकेश वर्मा, केपी दिनकर आदि सहित कार्यक्रम प्रभारी रामकरण आदर्शी शामिल रहे।
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न्याय की मांग
बांदा। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के को-आर्डिनेटर मुन्नालाल दिनकर ने बताया कि सपा सरकार में दलितों को उत्पीड़न हो रहा है। अधिकारियों व कर्मचारियों की उदासीनता से गरीब पट्टेधारकों को उनकी भूमि पर नहीं दिया जा रहा। उन्होंने पुलिस से अपनी कार्यशैली में बदलाव करने और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।
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