बांदा। करीब 20 साल बाद श्रावण-भादौ माह में सोमवार के दिन महापर्व व त्योहारों का अद्भुत संयोग बन रहा है। 10 जुलाई को सोमवार के दिन से सावन की शुरुआत होगी। सोमवार के दिन ही रक्षाबंधन व जन्माष्टमी मनाई जाएगी। सावन में सोमवती अमावस्या का भी संयोग बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य पंडित उमाकांत त्रिवेदी ने बताया कि सावन व भादौं माह में सोमवार के दिन महापर्वों का संयोग धर्म व आध्यात्मक की दृष्टि से श्रेष्ठ माना जाता है। 10 जुलाई को सोमवार के दिन शिव के प्रिय श्रावण माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र तथा सायंकाल सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।
सोमवार को ही सावन का समापन है। खास बात यह है कि सावन में इस साल 5 सोमवार पड़ेंगे। आखिरी सोमवार को रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक जिस वर्ष सावन में पांच सोमवार होते हैं, वह साल भक्त और देश के लिए अत्यंत ही शुभकारी रहता है।
शिव की कृपा बरसती है। यह स्थिति मास पर्यंत शिव उपासना के लिए श्रेयस्कर है। इसके अलावा सात अगस्त सोमवार को रक्षाबंधन का पर्व है। 14 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। 21 अगस्त को सोमवती अमावस्या होगी।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवश्यनी एकादशी मंगलवार को है। इस दिन से शादी-ब्याह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य चार माह के लिए बंद हो जाएंगे। अब शादी की शहनाइयां दीपावली बाद देवोत्थानी एकादशी से गूंजेंगी। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक देवश्यनी एकादशी पर भगवान विष्णु शयन करने चले जाते हैं। चातुर्मास के चार माह के अधिपति शिव होते हैं।
उनके अनुसार यह चातुर्मास देव उठावनी एकादशी 31अक्तूबर को समाप्त होंगे। हिंदू पर्व की शुरुआत गुरु पूर्णिमा से होती है। इसके बाद नागपंचमी, सावन के सोमवार, हरियाली अमावस्या, हरछठ, जन्माष्टमी, गोगा नवमी, गणेश उत्सव, अनंत चतुर्दशी, ऋषि पंचमी, रक्षा बंधन, शारदीय नवरात्र, दशहरा, दीपावली आदि पर्व चातुर्मास में ही पड़ेंगे।
-रक्षाबंधन व जन्माष्टमी भी होंगे इसी दिन
-20 सालों बाद पड़ रहा अद्भुत संयोग
अमर उजाला ब्यूरो