बांदा। अरहर की ‘उपास’ प्रजाति से बुंदेलखंड के किसानों को एक नई उम्मीद जगी है। दिल्ली से आई अरहर की यह नई प्रजाति चार माह में पककर तैयार होगी। 130 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार देगी। इसे काटने के बाद किसान उसी खेत में गेहूं की खेती भी कर सकेंगे। फसल में रोग लगने का भी कोई खतरा नहीं है। कृषि विभाग ने बानगी के लिए 8 क्विंटल बीज मंगाया है।
सामान्य अरहर की प्रजातियां सामान्य तौर पर 270 दिन में तैयार होती हैं। इनमें कहीं फली छेदक कीटों तो कभी अन्य रोगों से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अरहर की उपास (यूपीएस-120) प्रजाति किसानों के लिए संजीवनी साबित होगी।
अपर जिला कृषि अधिकारी नाथूराम वर्मा ने बताया कि इसकी बुवाई 15 जून से 15 जुलाई के बीच किसान कर सकते हैं। यह नवंबर के आखिरी तक पककर तैयार हो जाएगी। कोहरा व बदली के पहले तैयार होने की वजह से इस प्रजाति में फली छेदक व अन्य कीटों का डर भी नहीं रहेगा।
इसकी पैदावार प्रति हेक्टेयर 130 क्विंटल तक ली जा सकती है। उपास प्रजाति के अरहर की दाल खाने में भी स्वादिष्ट व पाचक होती है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की यह प्रजाति बुंदेलखंड में किसानों के लिए विशेष लाभकारी होगी। राजकीय बीज भंडारों में उपास प्रजाति का बीज 5 क्विंटल मंगाया गया है। इसकी किसानों में डिमांड भी बढ़ी है। इसे देखते हुए बीज और मंगाया जा रहा है।
-चार माह में पककर तैयार हो जाएगी अरहर की फसल
-रोग का भी खतरा नहीं, फिर गेहूं की भी फसल ले सकेंगे
-कृषि विभाग ने दिल्ली से मंगाया 5 क्विंटल बीज
अमर उजाला ब्यूरो