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अंधविश्वास और पाखंड विरोधी थे संत कबीर

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बांदा। संत परंपरा और सामाजिक आंदोलन के सूत्रधार संत शिरोमणी कबीर जयंती पर अनुयायियों ने याद कर उन्हें पुष्पांजलि दी। अंधविश्वास, पाखंड का विरोधी बताते हुए भाईचारा और सद्भाव का संदेश देने वाला महापुरुष बताया।
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शुक्रवार को अंबेडकर पार्क में संघमित्रा बौद्ध विहार के तत्वाधान में कबीर जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। सामाजिक चिंतक आरपी चौधरी ने कहा कि संत कबीर दुनिया के पहले और आखिरी व्यक्ति थे जिन्होंने कागज और पेन को हाथ लगाए बगैर अपनी वाणी से समाज को सही मार्ग दिखाया। उनकी वाणी और शब्दों का हरेक व्यक्ति अनुसरण करे तो समाज में वैचारिक क्रांति आ जाएगी।

संघ मित्रा बौद्ध विहार संयोजक मंडल राममिलन कोटार्य ने कहा कि संत कबीर अंधविश्वास, ढोंग, पाखंड और व्यक्ति पूजा के कट्टर विरोधी रहे। उन्होंने अपने पूरे जीवन काल में मानव को एक समान रहने और सद्भाव बनाने का प्रयास किया। सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने में उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव सेवा में व्यतीत किया।
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राजेंद्र कोटार्य, सुरेश प्रसाद, सुधा चौधरी आदि ने संत कबीर के दोहे सुनाकर सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक किया। इस मौके पर विजय प्रधान, भानु प्रताप, धनंजय चौधरी, सविता दयाल, आशा निर्मल, राकेश, वीरेंद्र, विमल, संतोष वर्मा, रामकेश, सत्यस्वरूप, लवलेश, जीतू, संजय, किरन सेठी, स्वाती सिंह, विद्या चौधरी आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता समाजसेवी रणजीत मास्टर और संचालन उदयभानु ने किया। समारोह के अंत में मिठाई बांटी गई।
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-कागज-पेन को छुए बगैर लोगों को किया जागरूक
-उनके अनुसरण से आ सकती है वैचारिक क्रांति
अमर उजाला ब्यूरो
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