चौकीदार नेताओं के भाषणों में मुहावरा बनने पर प्रदेश सरकार ने भी गांवों के चौकीदारों की सुध ले ली। छह वर्षों के बाद उन्हें कुछ सहूलियतों का पिटारा खोल दिया। मानदेय में एकमुश्त एक हजार रुपये का इजाफा कर दिया।
अब गांव के चौकीदार 2500 रुपये हर माह मानदेय प्राप्त करेंगे। टार्च, साइकिल, अनुरक्षण भत्ता आदि की भी सौगात दी है। यह इसी माह से लागू होगा। हालांकि अभी भी चौकीदारों को मलाल है कि उनका मानदेय मनरेगा मजदूरों से भी कम है।
गांवों में सुरक्षा और सूचनाओं को लेकर सबसे अहम भूमिका निभाने वाले लाल साफाधारक चौकीदारों को यदाकदा ही याद किया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने भाषण में खुद को चौकीदार का जुमला बोलने के बाद यह शब्द चौतरफा मुहावरा और भाषणों का मुद्दा बन गया है।
इसी बीच प्रदेश सरकार ने इसी माह आठ मार्च को चौकीदार यानी ग्राम प्रहरी का मानदेय और अन्य भत्तों व सुविधाओं में वृद्धि करने का शासनादेश जारी कर दिया। वर्ष 2012 से चौकीदारों का भत्ता नहीं बढ़ाया गया था। हालांकि अभी भी चौकीदारों को मलाल है कि उनका मानदेय मनरेगा मजदूरों से भी कम है।
प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार द्वारा आठ मार्च को जारी शासनादेश में ग्राम प्रहरी (चौकीदार) का मानदेय 1500 से बढ़ाकर 2500 रुपये करने, चार सेल की टार्च के लिए 320 रुपये, सेल के हर माह 60 रुपये, 10 वर्ष में एक साइकिल के लिए 3000 रुपये और साइकिल अनुरक्षण के लिए हर साल 600 रुपये तथा फोटो पहचान पत्र बनवाने के लिए 35 रुपये देने का आदेश दिया है।
इसके अलावा उन्हें लाल साफा, खाकी कोट, जर्सी, धोती, बेल्ट, चमड़े की पेटी, जूता आदि भी निर्धारित अवधि में दिए जाएंगे। चौकीदार थानों के अधीनस्थ काम करते हैं। उधर, चौकीदारों को अभी भी मलाल है कि उनका मानदेय मनरेगा मजदूरों से भी कम है।
अतर्रा थाना क्षेत्र के महोतरा गांव के चौकीदार कमल किशोर ने बताया कि फरवरी का मानदेय अभी तक नहीं मिला। टार्ज और पगड़ी वर्ष 2013 में मिली थी।
याद आए चौकीदार, मानदेय हुआ ढाई हजार
नेताओं के भाषणों में चौकीदार शब्द बना मुहावरा
प्रदेश सरकार ने जारी किया सौगातों का शासनादेश