बांदा में अस्थाई गोशाला में बंद अन्ना पशु।
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बांदा। 12 करोड़ रुपये से ज्यादा का चारा-भूसा खाने के बाद भी चित्रकूटधाम मंडल में 75 अन्ना पशुओं ने गोशालाओं में दम तोड़ दिया। हालांकि मवेशियों की मौत का यह सरकारी आंकड़ा हकीकत से दूर है। मंडल के पशु पालन विभाग ने शासन को भेजी रिपोर्ट में मौत और खर्च का यही आंकड़ा दिया है। बताया है कि मंडल में मई माह से चल रहे एक हजार से ज्यादा स्थायी और अस्थायी गोशालाओं/पशु आश्रय केंद्रों में 1.10 लाख पशु संरक्षित हैं।
मंडल के चारों जिलों में अन्ना पशुओं द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे जबरदस्त नुकसान को लेकर किसानों और ग्रामीणों में जमकर हायतौबा मची रही। चारों जिलों में आक्रोशित किसानों ने कई गांवों में अन्ना पशुओं के झुंड परिषदीय स्कूलों में बंद कर दिए।
विरोध-प्रदर्शन और सड़कों पर जाम लगाए। मुख्यमंत्री ने भी इन बातों का संज्ञान लिया। इस पर आनन-फानन गांवों में अस्थाई पशु आश्रय केंद्र और गोशालाएं बना दी गईं। स्थायी गोशालाओं की कुछ व्यवस्थाएं दुरुस्त की गईं। खेतों और सड़कों पर घूम रहे तीन लाख से ज्यादा अन्ना पशुओं में से मात्र 1.10 लाख पशुओं को इन गोशालाओं में संरक्षित कर दिया।
मई माह से चल रहे आश्रय केंद्रों और गोशालाओं की बाबत मंडल के पशुपालन विभाग ने शनिवार (21 दिसंबर) को शासन को रिपोर्ट भेजी है। मंडल के अपर निदेशक (पशु पालन द्वितीय) एके सिंह द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि मंडल में मई माह से चल रहे 1018 अस्थायी व स्थायी गोवंश आश्रय स्थल, कान्हा आश्रय केंद्र आदि में 1,10,717 पशु संरक्षित हैं।
इनके भरण-पोषण पर अब तक 12 करोड़ 37 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। अपर निदेशक ने शासन को यह भी अवगत कराया है कि इस अवधि में गोशालाओं में 75 पशुओं की मौत हुई है। इनमें बांदा में 32, चित्रकूट में 15, हमीरपुर में 14 व महोबा में 14 पशु शामिल हैं। पशुओं की मौत की वजह बीमारी व बुढ़ापा बताया है।