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30 नवंबर से ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति होगी ठप

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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में जल संस्थान राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत ग्राम विकास विभाग द्वारा संचालित लगभग 66 ग्रामीण पेयजल योजनाओं का संचालन 30 नवंबर से बंद कर सकता है। ग्राम विकास विभाग ने यहां पिछले वर्ष नवंबर से ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए कोई बजट नहीं दिया है।
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महाप्रबंधक ने इस स्थिति से जल संस्थान के अध्यक्ष और मंडलायुक्त को भी पत्र भेजकर आगाह करा दिया है। साथ ही अनुरोध किया कि इन हालातों से शासन को भी अवगत करा दें। उधर, जल संस्थान को पिछले तीन साल से अपना विभागीय बजट भी नहीं मिला है।

चित्रकूटधाम मंडल में जल संस्थान द्वारा 66 ग्रामीण पेयजल परियोजनाएं संचालित की जा रही है। महाप्रबंधक ने आयुक्त को भेजे पत्र में कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत 50 प्रतिशत से अधिक प्रगति वाली जेई, एईएस, आर्सेनिक और फ्लोराइड से प्रभावित तथा सांसद आदर्श गांव वाली 799 परियोजनाओं को पूरा किए जाने की प्राथमिकता बताई गई है, जबकि जल संस्थान ने वर्ष 2018-19 में ग्राम विकास विभाग से बजट मांगा था।
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आयुक्त ने भी पत्र भेजा था, लेकिन शासन के उपरोक्त पत्र से स्पष्ट हो रहा कि चित्रकूटधाम मंडल जल संस्थान को कोई भी धनराशि प्राप्त होने की संभावना नहीं है। महाप्रबंधक ने कहा कि पिछले वर्ष नवंबर 2017 से ग्रामीण पेयजल योजनाओं के लिए ग्राम विकास विभाग से कोई पैसा नहीं मिला है। इससे यहां कार्यरत कर्मचारियों के वेतन और पेंशन आदि तथा अन्य बकाया देनदारियां करोड़ों रुपये हो गई हैं।

बताया कि पांच माह का वेतन और पेंशन बकाया है। सेवानिवृत्त कर्मियों और ठेकेदारों द्वारा भुगतान के लिए अदालत में वाद दायर किए जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण पेयजल योजनाओं का संचालन और अनुरक्षण संभव नहीं हो पा रहा है। महाप्रबंधक ने दो टूक शब्दों में आयुक्त को अवगत कराया कि शासन से शीघ्र धन नहीं प्राप्त होता तो 30 नवंबर 2018 के बाद मंडल की ग्रामीण पेयजल योजनाओं का संचालन और अनुरक्षण बंद होने की नौबत आ सकती है।

चित्रकूटधाम मंडल के 1600 कार्यों में 1165 ऐसी हैं जिन्हें धनराशि ही नहीं मिली है। मुख्य रूप से ट्रीटमेंट प्लांट, जर्जर पाइप लाइन, उपकरण, मोटर, पंपिंग मशीन जैसे कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इनके लिए 1175 करोड़ की जरूरत है। 531 कार्य पहले से ही 75 फीसद तक पूर्ण हो चुके है। शेष 25 फीसदी कार्यों के लिए शासन से पैसा मिला है।

आमदनी एक करोड़, खर्च दो करोड़ रुपये
जल संस्थान के महाप्रबंधक रतनलाल का कहना है कि चित्रकूटधाम मंडल जल संस्थान को पिछले तीन वर्षों से विभागीय बजट नहीं मिला है। हर वर्ष करीब 50 करोड़ रुपये का बजट मिलता था। तीन वर्षों में जल संस्थान को लगभग डेढ़ अरब रुपये बजट नहीं मिला है।

मंडल में जल संस्थान में 1500 अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं। इनके वेतन में हर माह लगभग 1.80 करोड़ और पेयजल परियोजनाओं के रखरखाव में 20 से 25 लाख रुपये की दरकार होती है। यानी हर माह लगभग दो करोड़ रुपये का खर्च है। दूसरी तरफ जल संस्थान की कुल आय प्रतिमाह एक करोड़ है। विभाग को प्रतिमाह करीब एक करोड़ और चाहिए। पहले यह भरपाई पेयजल इकाइयों के संचालन और रखरखाव के लिए मिलने वाले बजट से की जाती थी, लेकिन तीन साल से शासन ने यह बजट भी बंद कर रखा है। जल संस्थान पर कर्मचारियों का वेतन, पेंशन व अन्य करीब 50 करोड़ की देनदारियां हैं।
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