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महिला कांस्टेबिल नीतू की मौत पर हाईकोर्ट सख्त

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2018 सितंबर में कमासिन थाने में तैनात महिला कांस्टेबल कुमारी नीतू शुक्ला की थाना परिसर में ही आत्महत्या के मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा आरोपी पुलिस कर्मियों को बचाने का मामला हाईकोर्ट तक जा पहुंचा है।
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हाईकोर्ट ने यहां की स्थानीय अदालत द्वारा खारिज की गई मृतका के भाई की अर्जी पर संज्ञान लिया। साथ ही निचली अदालत को आदेश दिया है कि नई अर्जी लेकर नए सिरे से सुनवाई करके आदेश पारित करें। मंगलवार को मृतका का भाई सीजेएम अदालत में फिर अर्जी देंगे।


चार सितंबर, 2018 को कमासिन थाने में तैनात नीतू शुक्ला ने शाम को थाना परिसर में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के पिता (पुलिस सब इंस्पेक्टर) अनिल कुमार शुक्ला और भाई राघवेंद्र शुक्ला (अधिवक्ता) शुरू से ही इसे हत्या का मामला बता रहे थे। तत्कालीन थानाध्यक्ष और कई पुलिस कर्मियों पर आरोप लगा रहे थे।
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भाई राघवेंद्र ने 19 नवंबर, 2018 को यहां सीजेएम कोर्ट में अर्जी देकर हत्या की रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग की थी। याचिका अर्जी में एसपी, अपर एसपी, तत्कालीन महिला थानाध्यक्ष प्रतिमा सिंह और कांस्टेबल योगेश मौर्या, रावेंद्र साहू, तसलीम अहमद, ज्ञान प्रकाश ओझा और हरेंद्र पाल को अभियुक्त बनाया था।

सीजेएम न्यायालय ने सुनवाई के बाद यह अर्जी खारिज कर दी। इस पर मृतक के भाई राघवेंद्र ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने 28 फरवरी 2019 को अपने पांच पृष्ठीय आदेश में सीजेएम को आदेश दिया कि नए सिरे से अर्जी देकर इस पर आदेश पारित करें।


सीजेएम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल करने के लिए भाई राघवेंद्र सोमवार को बांदा पहुंच गया। बताया कि अपने अधिवक्ता के माध्यम से मंगलवार को वह सीजेएम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल करके एसपी, अपर एसपी और थानाध्यक्ष सहित सभी आठ आरोपियों को शामिल करने का अनुरोध करेंगे।

राघवेंद्र ने आरोप लगाया कि इस मामले में पुलिस शुरू से ही आरोपियों को बचाने और मामले में लीपापोती करने की कोशिश कर रही है। नीतू का सुसाइड लेटर भी आज तक उसे नहीं दिया गया।


इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की भनक मिलते ही पुलिस ने मृतका नीतू के भाई की पुरानी तहरीर के आधार पर आनन-फानन रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसमें मात्र एक कांस्टेबल हरेंद्र सिंह को नामजद किया।

एक अज्ञात दर्ज किया है। इस एफआईआर में राघवेंद्र ने कहा है कि उसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई। नीतू के मोबाइल फोन का कॉल डिटेल भी नहीं मिला। हर बार इज्जत-आबरू का हवाला देकर टाल दिया जाता है।

राघवेंद्र ने अपनी तहरीर में कहा है कि हरेंद्र पाल व थाने के कुछ पुलिस कर्मियों ने उसकी बहन की हत्या की है और इसे आत्महत्या का रूप दिया जा रहा है। राघवेंद्र ने बताया कि पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर भी उसकी तहरीर के आधार पर नहीं है। मात्र एक अज्ञात दर्शाया गया है।
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