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Banda: मेडिकल काॅलेज के 51 फीसदी एमबीबीएस छात्र फेल, खराब परिणाम पर गिनाए ये कारण

Mon, 06 Mar 2023 12:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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बांदा जिले में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का परिणाम रानी दुर्गावती मेडिकल काॅलेज के लिए चौंकाने वाला रहा। यहां के 51 फीसदी छात्र-छात्राएं फेल हो गए। खराब परिणाम से मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। खराब रिजल्ट आने पर मेडिकल काॅलेज प्रशासन तरह-तरह की दलीलें दे रहा है। प्राचार्य ने शिक्षकों के साथ बैठक कर इसकी समीक्षा की।
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एमबीबीएस प्रथम वर्ष परीक्षा परिणाम शनिवार को घोषित हुआ। वर्ष 2021-22 में अध्ययनरत एमबीबीएस प्रथम वर्ष के 100 छात्रों में 51 फेल हो गए। 49 छात्र-छात्राएं ही पास हुए हैं। रिजल्ट खराब आने से मेडिकल काॅलेज प्रशासन चिंतित है। मान्यता पर असर पड़ सकता है। हालांकि दलील दी जा रही है कि बीच सत्र में प्रोफेसरों के स्थानांतरण से पढ़ाई पर ज्यादा असर पड़ा है। नए प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर यहां आए तो उन्हें समझने में दो-तीन हफ्ते निकल गए। इन्हीं सब कारणों से परिणाम बेहतर नहीं रहा।

प्राचार्य डॉ. मुकेश कुमार यादव ने बताया कि अगली परीक्षा का परिणाम बेहतर बनाने के लिए कवायदें शुरू की गई हैं। साथ ही मेडिकल काॅलेज के सभी चिकित्सा शिक्षकों के साथ बैठक कर खराब परिणाम की समीक्षा की जाएगी। उनके सुझाव पर अमल करते हुए विश्वविद्यालय को भी अवगत कराया जाएगा, जिससे अगला रिजल्ट बेहतर हो।
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खराब परिणाम पर गिनाए ये कारण
1. यूनिवर्सिटी बदल गई : पूर्व में रानी दुर्गावती मेडिकल काॅलेज लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध था। अब लखनऊ के ही अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल काॅलेज यूनिवर्सिटी से संबद्ध कर दिया गया।
2. पढ़ाई का तरीका बदला : एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) द्वारा पढ़ाई के तरीके में बदलाव किया गया है। कंपीटेंसी मेडिकल एजूकेशन पैटर्न लागू किया गया। इससे बड़ा फर्क पड़ा है।
3. पढ़ाई का समय घटा : पूर्व में एक सत्र डेढ़ साल का होता था, अब एक साल का कर दिया गया। इसमें भी प्रवेश देर से होने के चलते पढ़ाई का समय और कम हुआ।
4. चिकित्सा शिक्षकों का स्थानांतरण : बीच सत्र में चिकित्सा शिक्षकों का स्थानांतरण कर दिए जाने से पढ़ाई ज्यादा प्रभावित हुई। यहां स्थानांतरित कुछ शिक्षक आए और कई नहीं आए। मेडिकल काॅलेज प्रशासन ने इस बाबत शासन को भी अवगत कराया है।
5. ऑनलाइन कापी चेकिंग : पूर्व में मैनुअल कापियों की जांच होती थी। अब कंप्यूटराइज्ड चेकिंग होने लगी। ऐसे में राइटिंग ज्यादा मायने रखती है। अच्छी राइटिंग न होने पर नंबर कट जाते हैं।
 
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मान्यता के लिए एनएमसी टीम का इंतजार
वर्ष 2023-24 शिक्षा सत्र की मान्यता के लिए रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज तैयारियों में जुटा है। एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) टीम का भ्रमण होना है। प्राचार्य डा.मुकेश कुमार यादव ने बताया कि 14, 15, 16 व 17 मार्च में किसी भी तिथि को टीम यहां निरीक्षण पर आ सकती है। मान्यता के लिए जो मानक तय हैं उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। जो कमियां हैं उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। निरीक्षण से पूर्व चिकित्सा शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
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