लोहिया गांवों को सरकारी स्तर पर मिल रही प्राथमिकता और गांवों की हकीकत में जमीन आसमान का फर्क है। प्रदेश सरकार इन गांवों के लिए अपने खजाने की थैली का मुंह खोले है, लेकिन गांवों की सूरत नहीं बदली। पिछले वर्ष के चयनित 28 लोहिया गांवों को शत-प्रतिशत संतृप्त होने की रिपोर्ट शासन को भेजी गई, पर इस रिपोर्ट की पोल गांवों की असलियत खोल रही है।
इन गांवों में 3909 शौचालयों का निर्माण दिखाकर 3,10,79,400 रुपये सरकारी खजाने से निकाले जा चुके हैं। बांदा मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर लोहिया ग्राम में चयनित पड़ुई गांव की हकीकत ये है कि यहां करीब 50 फीसदी शौचालय का अतापता तक नहीं है।
25 शौचालय पूर्ण मिले तो करीब आधा सैकड़ा शौचालय अर्ध निर्मित हैं। प्रधान और सचिव ने लाभार्थियों को 800-800 ईंट और 3-3 बोरी सीमेंट के अलावा कुछ सरिया की छड़ें दी हैं। गड्ढे भी डेढ़ मीटर के बजाए एक मीटर के बनाए गए हैं। इस गांव के लिए पंचायती राज विभाग ने 7.22 लाख रुपये जारी किए हैं।
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गांव के राम औतार बताते हैं कि प्रधान ने 2423 रुपये में शौचालय बनवाने का ठेका दे रखा है। तीन माह हो गए, लेकिन गड्ढे उसी तरह खुले पड़े हैं। गड्ढा उसने खुद खोदा। प्रधान ने मजदूर भी नहीं दिए। घटिया ईंटें, क्रेसर की डस्ट से जोड़ाई हुई है। हाथ रखने पर मसाला झड़ रहा है।’
गांव के सुखलाल प्रजापति ने बताया कि तीन माह में शौचालय के लिए सिर्फ गड्ढे खुदे पड़े हैं। प्रधान ने घटिया ईंटें मंगाकर रख दी हैं। 7 बोरी की जगह सिर्फ 3 बोरी सीमेंट दी है। ठेकेदार का कहीं अता-पता नहीं है। जानवरों के धक्के से बिखर रहीं ईटें चकनाचूर हो रही हैं’।
प्रधान बोले- मानक पता नहीं, सचिव बताएंगे
प्रधान उर्मिला यादव के घर में पति गोविंद यादव और उनके कोटेदार पिता रामचंद्र मौजूद मिले। वहां खड़े एक लाभार्थी ने प्रधान के सामने ही घटिया शौचालयों की बात छेड़ दी। इस पर प्रधान थोड़ा असहज हुईं। शौचालय निर्माण के मानक के बारे में पूछा तो बोले सचिव निरंजन शुक्ला ही बता सकते हैं, उन्हें जानकारी नहीं है।
बीच में ही प्रधान के कोटेदार पिता बोल पड़े कि इस महंगाई में 10 हजार में क्या होता है। प्रधान ने बताया कि 157 में 140 शौचालय बन गए हैं। जिन 25 लाभार्थियों ने अंशदान नहीं दिया, उन्हीं के बाकी हैं।
सभी शौचालय बनकर तैयार
डीपीआरओ रणधीर सिंह ने बताया कि 28 लोहिया गांवों में शौचालयों का पैसा भेज दिया गया है। सभी लाभार्थियों के यहां शौचालय बन गए हैं। इसका सत्यापन भी किया गया है। किसी ने द्वेषवश मीडिया को गलत जानकारी दे दी है। कुछ लाभार्थी कटाई-मड़ाई की वजह से नहीं बनवा पाए। उनके भी शौचालय जल्द बनवा दिए जाएंगे।’