ओला, बारिश से बर्बाद हुए किसानों को भरपूर सहायता के पीटे जा रहे ढिंढोरे के बीच यह तथ्य भी उजागर हुए हैं कि मंडल के करीब 41 हजार किसानों को अभी तक राहत के नाम पर धेला नहीं मिला है।
मंडल के चारों जिलों के पीड़ित किसानाें के लिए शासन से 1023 करोड़ रुपये मांगे गए थे। सरकार ने अब तक बमुश्किल 495 करोड़ रुपये ही दिए हैं, जो 50 फीसदी से भी कम हैं।
मार्च और अप्रैल में चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों ने बेमौसम की बारिश और ओलावृष्टि ने खेतीबाड़ी चौपट कर दी थी। चारों जिलों के प्रशासन ने कुल 9,09,712 किसानों को इस दैवी आपदा से प्रभावित माना है।
साथ ही पूरे मंडल में 9,93,252 हेक्टेअर खेती प्रभावित बताई गई। चारों जिलों के प्रशासन ने अपने-अपने सर्वे के आधार पर प्रदेश सरकार से कुल 10 अरब 23 करोड़ 84 लाख रुपये किसानों के लिए मांगे थे, लेकिन सरकार ने अब तक सिर्फ 4 अरब 95 करोड़ 62 लाख रुपये ही दिए हैं।
शासन से मिले पैसे को चारों जिलों में प्रभावित किसानों को बांटा गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 4 अरब 87 करोड़ 42 लाख रुपये 8, 68,751 किसानों को बांटे गए हैं। अभी मंडल के 40,961 किसान राहत राशि के इंतजार में हैं। ये सभी बड़े काश्तकार हैं।
महोबा और चित्रकूट ने नहीं बांटे 8.20 करोड़
किसानों को राहत राशि बांटने में जहां बांदा और हमीरपुर जनपद अव्वल रहे वहीं चित्रकूट और महोबा जिले शासन से मिली पूरी राशि बांटने में फिसड्डी साबित हुए।
इन दोनों जिलों के पास किसानों के हक का 8 करोड़ 20 लाख रुपया बचा है। हालांकि दोनों ही जिलों के राजस्व अधिकारियों का कहना है कि सर्वे के आधार पर राहत राशि बांटने का सिलसिला जारी है। चित्रकूट जनपद में 4 करोड़ और महोबा जनपद में 4 करोड़ 20 लाख रुपये नहीं बंट सके हैं। यह धन प्रशासन के खजाने में है।