बांदा का नवनिर्मित मेडिकल कालेज।
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बांदा। मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की मान्यता मिलने के बाद एक तरफ जहां अगले माह से यहां के नवनिर्मित मेडिकल कालेज में एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने की जोरशोर से तैयारी चल रही है वहीं दूसरी तरफ पहली जुलाई से ही मेडिकल कालेज में डाक्टरों की भारी किल्लत हो जाएगी। संविदा अवधि पूरी होने पर गुरुवार (30 जून) को 40 जूनियर रेजीडेंट डाक्टरों की सेवाएं समाप्त हो गईं। कालेज प्रधानाचार्य ने नोटिस जारी कर इन्हें सेवा विस्तार आदेश जारी न होने तक ड्यूटी से रोक दिया है। इससे मेडिकल कालेज की स्वास्थ्य सेवाएं भी लड़ खड़ा जाएंगी। मेडिकल कालेज में 100 सीट की एमबीबीएस कक्षाएं अगले माह शुरू होनी हैं।
इसके मानक और तैयारियां पूरी कर लेने पर हाल ही में एमसीआई ने मान्यता दे दी है। इन कक्षाओं के लिए मेडिकल कालेज में काफी उत्साह देखा जा रहा था लेकिन गुरुवार (30 जून) को मेडिकल कालेज के 40 संविदा डाक्टरों की संविदा अवधि पूरी होने और आगे काम करने के लिए फिलहाल उनका नवीनीकरण न करने पर इन सभी डाक्टरों को पहली जुलाई से ड्यूटी से रोक दिया गया है। प्रधानाचार्य डा. सुनील कुमार आर्य द्वारा जारी नोटिस में मेडिकल कालेज के सभी जूनियर/सीनियर रेजीडेंट (डाक्टर) को सूचित किया है कि उनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। फिलहाल उनकी सेवा विस्तार का मामला विचाराधीन है। प्रधानाचार्य ने कहा कि पहली जुलाई 2016 से यह सभी संविदा डाक्टर तभी ड्यूटी पर आएं जब उनकी सेवा विस्तार का आदेश हो जाए। अन्यथा मेडिकल कालेज में ड्यूटी करते मिलने पर शासकीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मेडिकल कालेज प्रशासन उन्हें कोई भुगतान नहीं करेगा। एकमुश्त 40 संविदा डाक्टरों की सेवा समाप्त होने पर मेडिकल कालेज में पहली जुलाई (शुक्रवार) से स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ाने के आसार हैं। मेडिकल कालेज में जूनियर रेजीडेंट के कुल 40 पद हैं। इन सभी पर संविदा के आधार पर रखे गए जूनियर डाक्टर काम कर रहे हैं। मेडिकल कालेज में रोजाना 700-800 मरीजों आमद हो रही है। इनमें लगभग आधा सैकड़ा मरीज आईपीडी में भर्ती भी होते हैं।