बांदा। एक ओर जहां अधिकांश गरीब परिवार दाने-दाने को मोहताज हैं, तो दूसरी तरफ देश और उत्तर प्रदेश में सैकड़ों मीट्रिक टन अनाज गोदामों में सड़कर बर्बाद हो रहा है। इसे बचा लिया जाए तो लाखों परिवारों का पेट भर सकते हैं। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के ताजा आंकड़े इसके गवाह हैं। करीब तीन साल में उत्तर प्रदेश में 381 मीट्रिक टन से ज्यादा अनाज (गेहूं-चावल) गोदामों में सड़ गया। देश स्तर पर यह आंकड़ा 8097 मीट्रिक टन से ज्यादा है।
सरकारी गोदामों में गेहूं-चावल आदि राशन सड़कर बर्बाद (डैमेज) होने की बात भारतीय खाद्य निगम ने खुद स्वीकारी हैं। बुंदेलखंड के आरटीआई कार्यकर्ता कुलदीप शुक्ला द्वारा मांगी गई सूचना में भारतीय खाद्य निगम ने देश में बर्बाद हुए अनाज के पिछले तीन वर्षों के आंकड़े बताए हैं।
सभी राज्यों के अलग-अलग आंकड़े दिए हैं। भारतीय खाद्य निगम के मुताबिक उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017-18 में कुल 242.850 मीट्रिक टन राशन बर्बाद हुआ है। इसमे 230.160 मीट्रिक टन गेहूं और 12.690 मीट्रिक टन चावल शामिल है। वर्ष 2018-19 में प्रदेश में 115.784 मीट्रिक टन अनाज की बर्बाद हुई। इसमें 17.486 मीट्रिक टन गेहूं और 98.298 मीट्रिक टन चावल शामिल है।
एफसीआई ने चालू वर्ष 2019-20 में अनाज बर्बादी के आंकड़े सितंबर तक दिए है। इसमें इस वर्ष बीते 8 माह में कुल 22.971 मीट्रिक टन अनाज सड़ा या डैमेज हुआ है। इसमें 6.091 मीट्रिक टन गेहूं और 16.880 मीट्रिक टन चावल है। निगम की आरटीआई सूचना के मुताबिक करीब पौने तीन वर्षों में कुल 381.608 मीट्रिक टन अनाज बर्बाद हुआ। इसमें 253.737 मीट्रिक टन गेहूं और 127.868 मीट्रिक टन चावल शामिल है।
देश में 8097 मीट्रिक टन अनाज की बर्बादी
बांदा। एफसीआई आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 से अगस्त 2019-20 तक पौने तीन साल में देश के सभी 25 राज्यों में कुल 8097.564 मीट्रिक टन अनाज बर्बाद हुआ। इसमें 2385.844 मीट्रिक टन गेहूं और 5711.720 मीट्रिक टन चावल शामिल है। वर्ष 2017-18 में 819.770 मीट्रिक टन गेहूं और 1843.716 मीट्रिक टन चावल डैमेज हुआ। चालू वर्ष 2019-20 में पहली सितंबर तक 146.422 मीट्रिक टन गेहूं और 74.623 मीट्रिक टन चावल खराब होने के आंकड़े दिए गए हैं।
बुंदेलखंड में भी खराब हुआ अनाज
बांदा। दैवीय आपदाओं और प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों के चलते हमेशा से अनाज की कम पैदावार का दंश झेल रहे बुंदेलखंड में भी एफसीआई के गोदामों में अनाज पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा। यहां भी राशन सड़कर या अन्य तरीकों से बर्बाद हुआ। कुलदीप शुक्ल को दी आरटीआई सूचना में भारतीय खाद्य निगम के भोपाल (मध्य प्रदेश) स्थित कार्यालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी विजय कुमार द्वारा दी गई सूचना में बताया गया है कि बीते वर्ष 218-19 में बुंदेलखंड के निवाड़ी (झांसी) में 4.970 मीट्रिक टन चावल डैमेज हुआ है।
सबसे ज्यादा बर्बादी बिहार में
बांदा। राशन की बर्बादी में बिहार राज्य सबसे आगे है। भारतीय खाद्य निगम द्वारा आरटीआई में दी गई राज्यवार सूचना में यह बात सामने आई है। वर्ष 2017-18 में सबसे ज्यादा 1616.601 मीट्रिक टन राशन बिहार में बर्बाद हुआ है। वर्ष 2018-19 में भी सर्वाधिक 3567.654 मीट्रिक टन गेहूं-चावल बिहार में डैमेज हुआ है। कई राज्य ऐसे भी है जहां एफसीआई राशन बर्बाद नहीं होने देती। इनमें अरूणांचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश, उत्तराखंड आदि शामिल है।