बांदा। तीन विभागों की खींचतान में जिले के 30 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण अटका है। इनके निर्माण की जिम्मेदारी बाल विकास, पंचायती राज और ग्राम्य विकास विभागों को संयुक्त रूप से सौंपी गई थी। इन तीनों को लगभग ढाई करोड़ रुपये भी दिए जा चुके हैं। बाल विकास को छोड़कर दोनों विभाग इसमें कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। नतीजतन करीब एक साल से निर्माण अधूरे पड़े हैं।
शासन से वर्ष 2018-19 में जिले में 30 आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत हुए थे। प्रत्येक की लागत 8 लाख 6 हजार रुपये निर्धारित है। इसमें दो लाख रुपये बाल विकास पुष्टाहार, पांच लाख ग्राम विकास विभाग और एक लाख छह हजार रुपये पंचायती राज विभाग को प्रति केंद्र के हिसाब से दिए गए थे। एक वर्ष बीत गया और आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण पूरा नहीं हुआ, जबकि शासन ने इनका निर्माण बीते मार्च (2019) तक पूरा होने के निर्देश दिए थे।
प्रभारी बाल विकास पुष्टाहार अधिकारी संजीव कुमार बघेल का कहना है कि अपने विभाग का 60 लाख रुपया ग्राम पंचायतों को पहले ही दिया जा चुका है। अब ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभागों को अपने हिस्से का पैसा लगाकर निर्माण कराना है, लेकिन दोनों विभागों द्वारा निर्माण नहीं कराया जा रहा। इसके लिए खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
इन गांवों में बनना है आंगनबाड़ी केंद्र
बिसंडा ब्लाक : मझीवांसानी। बबेरू : काजीटोला व मियां बरौली। कमासिन : औदहा। नरैनी : लुधौरा, पोंगरी व करतल। तिंदवारी : अतरहट, अमलोर, जसईपुर व मिरगहनी। बड़ोखर खुर्द : जलालपुर, भुरेड़ी, मोहन पुरवा। महुआ : मोतियारी।
1455 केंद्रों के पास खुद के भवन नहीं
जिले में 1705 आंगनबाड़ी केंद्र है। इनमें 250 केंद्र विभागीय भवनों में चल रहे हैं। शेष 1455 केंद्र या तो परिषदीय विद्यालयों व पंचायत भवनों में चल रहे हैं या फिर किराए के भवन में।