बांदा। बुंदेलखंड के कुछ जिलों समेत प्रदेश के 30 जिलों के सूखे की चपेट में आने पर कृषि विभाग के जारी अलर्ट का मुद्दा बुधवार को संसद में मानसून सत्र के पहले ही दिन गूंजा। अन्य दैवी आपदाओं और खासकर तूफान आदि को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियों पर भाजपा सांसद ने ही सवाल किए।
प्रदेश के 30 जिलों में 40 फीसदी से कम बारिश होने पर कृषि विभाग ने सूखाग्रस्त बताया है। इनमें बुंदेलखंड के महोबा और चित्रकूट जिले भी शामिल हैं। कृषि विभाग ने कहा है कि इन जिलों में खरीफ की बुवाई और रोपाई काफी पिछड़ गई है। ‘अमर उजाला’ में यह खबर बुधवार को प्रमुखता से प्रकाशित हुई। उधर, बुधवार को ही शुरू हुए संसद के मानसून सत्र में भी यह मुद्दा गूंज उठा।
बांदा-चित्रकूट के भाजपा सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने शून्य काल के दौरान लोकसभा अध्यक्ष का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि संसद में मंत्री ने यह स्वीकार किया है कि तूफान संबंधी पूर्व जानकारियां हासिल करने के लिए वैज्ञानिकों की काफी कमी है।
सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश के 30 जिलों समेत उनके निर्वाचन क्षेत्र चित्रकूट और महोबा जिले भी सूखे की चपेट में आने वाले जिलों में शामिल हैं। बुंदेलखंड में तूफान जैसी दैवी आपदाएं भी आती रहती हैं।
सांसद ने संबंधित मंत्री से सवाल किया कि इन सूखाग्रस्त जिलों और खासकर बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में तूफान के शोध और सूखे जैसी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने क्या किया है? सांसद ने बताया कि केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने लोकसभा में सांसद को आश्वासन दिया कि इस बारे में केंद्र सरकार प्रयास और कार्रवाई कर रही है।
दैवी आपदा पीड़ितों को 63.90 लाख की मदद
बांदा। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बांदा जिले में आंधी-तूफान, बेमौसम बारिश, आकाशीय बिजली, लू प्रकोप आदि दैवी आपदाओं के पीड़ितों को आर्थिक मदद के लिए प्रदेश सरकार ने 70 लाख रुपये का बजट दिया था। इसमें 63 लाख 90 हजार रुपये पीड़ितों को वितरित किए गए। इसी तरह अग्निकांड पीड़ितों के लिए 50 लाख रुपये का बजट दिया गया था। अग्निकांड में इस वर्ष मात्र एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है।