बांदा। कालिंजर और पुरातत्व महत्व पर आयोजित
राष्ट्रीय सेमिनार में ऐतिहासिक कालिंजर किले को समस्याओं से घिरा बताते
हुए यहां खुले म्यूजियम की जरूरत बताई गई।
बुंदेलखंड मेें पर्यटन
विकास के लिए मुख्यमंत्री से हुई बातचीत की जानकारी मंडलायुक्त ने दी। 21
साल की खोज के बाद दुर्ग में मिली रॉक पेंटिंग को आज तक रहस्यमयी बताया
गया।
रविवार को यहां केसीएनआईटी में आयोजित सेमीनार में कालिंजर पर
पिछले दो दशकों से शोध कर रहे प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक विजय कुमार
ने कहा कि कालिंजर की समस्याएं दूर की जानी चाहिए।
सड़केें बेहतर
हों और खुला म्यूजियम हो। उन्होंने कहा कि 21 साल की खोज के बाद कालिंजर
दुर्ग में मिली रॉक पेंटिंग रहस्यमयी हैं। उन्होंने कालिंजर पर किए गए
रिसर्च को प्रोजेक्टर के जरिये दिखाया।
मंडलायुक्त एल वेंकटेश्वर
लू ने कहा कि चरखारी, महोबा, कालिंजर, चित्रकूट, पन्ना और खजुराहो का आपस
में सड़क मार्ग में जोड़ा जाना चाहिए। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यटन
विभागाध्यक्ष डॉ. ओपी कंडारी ने कहा कि बुंदेलखंड में अतिथि देवो भव: की
भावना हमेशा रही है।
उन्होंने कहा कि टूरिज्म ऐसा उद्योग है,
जिसमें उत्पाद बनाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने पर्यटन को रोजगार से
जोड़ने के कई नुस्खे बताए।
भारतीय पुरातत्व संस्थान के डायरेक्टर
राजेंद्र यादव ने बुंदेलखंड में पर्यटन को लेकर अपने 18 साल के अनुभव बताए।
झांसी के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. सुरेश दुबे ने कहा कि ऐसे
सेमिनार ऐतिहासिक और उपयोगी हैं।
सेमिनार का आयोजन बुंदेलखंड टूरिज्म और इंटेक ने मिलजुलकर किया था। इसका विषय- ‘हिस्ट्री एंड आर्कियोलाजी आफ कालिंजर फोर्ट’ था।
बुंदेलखंड
टूरिज्म के श्यामजी निगम ने टूरिज्म की परिभाषा का बखूबी जिक्र किया।
इंटेक बांदा चेप्टर के कनवीनर हारिस जमां ने सेमिनार में आए सभी विशेषज्ञों
और अतिथियों का स्वागत किया।
केसीएनआईटी चेयरमैन अरुण निगम ने
आभार जताते हुए कहा कि कालिंजर की कायापलट के लिए किए जा रहे प्रयासों में
यह सेमिनार मील का पत्थर बनेगा।
संचालन बुंदेलखंड टूरिज्म की
रीतिका सहगल ने किया। बीडी गुप्ता और अरविंद छिरौलिया को शाल ओढ़ाकर
सम्मानित किया गया। रमेश पाल की टीम ने दीवारी नृत्य प्रस्तुत किया।
सेमिनार
में नगर पालिका अध्यक्ष विनोद जैन, इंटेक की सांस्कृतिक सचिव आशा सिंह,
समाजसेवी सीमा सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा आदि शामिल रहे।