बांदा। 29 बोरा प्रतिबंधित खेसारी (चटरी) दाल बरामद होने के जुर्म में पूर्व प्रधान सहित दो अभियुक्तों को अदालत ने 3-3 वर्ष की जेल और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
कोतवाली देहात के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कृपाल सिंह परिहार ने अपनी टीम के साथ 31 जुलाई 2008 को करहिया गांव के तत्कालीन ग्राम प्रधान विजय बहादुर सिंह और फतेहपुर जिले में मलवां थाना क्षेत्र के भदवां गांव निवासी प्रमोद कुमार गुप्ता पुत्र देवीदयाल को खेसारी दाल से भरे 29 बोरे पूर्व प्रधान के घर में रखते समय रंगेहाथ पकड़ लिया था। अभियुक्तों ने स्वीकारा था कि वह इसे अरहर की दाल बताकर बेचते हैं।
दोनों के पास कारोबार का कोई रजिस्ट्रेशन भी नहीं था। पुलिस ने दोनों को धारा 3/4 खेसारी प्रतिबंधित एक्ट व धारा 273 आईपीसी में जेल भेज दिया था। कुछ दिन बाद वह जमानत पर बाहर आ गए थे। पुलिस ने तफ्तीश के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
त्वरित न्यायालय के अपर जिला सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की सुनवाई के बाद शुक्रवार को इसका फैसला सुनाते हुए पूर्व प्रधान विजय बहादुर सिंह और प्रमोद कुमार गुप्ता को धारा 2/3 खेसारी ग्राम प्रतिबंधित अधिनियम में 3-3 वर्ष की कैद और 30-30 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर 1-1 साल की अतिरिक्त जेल भोगनी होगी।
आईपीसी की धारा 273 में प्रत्येक को 4-4 माह की कारावास और 1-1 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर 15 दिन की अतिरिक्त जेल होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता आशुतोष मिश्र ने पैरवी करते हुए तीन गवाह पेश किए।