बांदा। बारिश का पानी नदी व नालों में रोककर फसलों की सिंचाई के लिए बुंदेलखंड पैकेज से पिछले साल 52 चेकडैमों के लिए 16.43 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। इसमें से लघु सिंचाई विभाग ने 11 करोड़ रुपये खर्च कर डाले। लेकिन एक भी चेकडैम बनकर तैयार नहीं हुआ। अब मानसून सिर पर है और शासन के दबाव के चलते मानकों को दरकिनार कर आनन-फानन चेकडैम बनाए जा रहे हैं।
प्रत्येक चेकडैम में 30 से 60 हेक्टेयर की सिंचाई का उद्देश्य है। केंद्र सरकार ने पिछले साल बुंदेलखंड पैकेज से 52 चेकडैमों के लिए 16 करोड़ 43 लाख 52 हजार रुपये स्वीकृत किए। इसमें से लघु सिंचाई विभाग को 11 करोड़ रुपये कर दिए गए। बबेरू में 21, महुआ ब्लाक में 4, बड़ोखर ब्लाक में 9, बिसंडा में 7, बबेरू में 6, तिंदवारी में 4 व कमासिन ब्लाक में एक चेकडैम बनना था।
प्रत्येक चेकडैम की लागत लंबाई व चौड़ाई के आधार पर 26 से 40 लाख रुपये तक है। शासन ने 15 जून के पहले सभी चेकडैम तैयार करने की सख्त ताकीद की थी। लेकिन अभी तक अधिकांश चेकडैमों का काम अधूरा है। दिसंबर माह से बालू की किल्लत से तकरीबन पांच माह काम पूरी तरह ठप रहा।
इधर, बालू महंगी होने से चेकडैम में खर्च ज्यादा आ रहा है। शासन के दबाव के चलते ठेकेदारों ने दूसरी तरकीब निकाली है। नदी का रेता व छरर्रु (पानी की तलटही में पाई जाने वाली बजरी) से चेकडैम बनाए जा रहे हैं।
श्यामलाल नोडल अधिकारी/अवर अभियंता लघु सिंचाई विभाग ने कहा कि चेकडैम के निर्माण का कार्य जल्द से जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जा रहा है। घटिया कार्य की जहां भी शिकायत होगी जांच की जाएगी। ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई को लिखा जाएगा। बालू संकट से भी देरी हुई।
-अब बरसात सिर पर तो निर्माण हुआ तेज
-बुंदेलखंड पैकेज से मिले थे 16.43 करोड़ रुपये
-लघु सिंचाई विभाग पर 52 चेकडैम बनाने का जिम्मा
अमर उजाला ब्यूरो