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सात मीसा बंदियों की रोक दी पेंशन

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बांदा। हाईकोर्ट के आदेश पर खंगाले गए राजनैतिक मीसा बंदी (लोकतंत्र रक्षक सेनानियों) के इतिहास में सात मीसा बंदियों को अपात्र पाए जाने पर उनकी पेंशन/सम्मान राशि रोक दी गई है। इनमें से पांच पर आपराधिक मामले पाए गए हैं, जबकि दो के पतों का सत्यापन नहीं हो पाया। इनके अलावा 22 मृतक मीसा बंदियों की भी जांच कराई जा रही है। इनकी विधवा पत्नियों को पेंशन दी जा रही है। इनके अतिरिक्त 75 मीसा बंदियों को जांच में क्लीनचिट दे दी गई है।
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1975 के मीसा बंदियों को लोकतंत्र रक्षक सेनानी का खिताब देकर वर्ष 2012 में सपा सरकार ने उन्हें पेंशन/सम्मान राशि दिए जाने की शुरुआत की थी। इसमें बांदा जिले के 102 मीसा बंदी शामिल हैं। उन्हें पेंशन दी जा रही थी। अक्तूबर 2018 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मीसा बंदियों की पात्रता को लेकर दायर याचिका में सुनवाई के बाद मीसा बंदियों की पात्रता की जांच कराने के आदेश दिए थे।

इस पर शासन के निर्देश से डीएम ने यहां जीवित 80 मीसा बंदियों की पात्रता की जांच पुलिस से कराई। जांच में पांच मीसा बंदियों पर आपराधिक मुकदमे पाए गए। रिपोर्ट आने के बाद पांचों मीसा बंदियों की पेंशन और अन्य सुविधाएं तत्काल प्रभाव से रोक दी गई हैं। उनसे रिकवरी की तैयारी की जा रही है। एडीएम संतोष बहादुर ने बताया कि इन अपात्र मीसा बंदियों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। वहां से निर्देश मिलने पर अब तक भुगतान की गई सम्मान राशि की वसूली जा सकती है।
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22 दिवंगत बंदियों की भी जांच
जीवित लोकतंत्र सेनानियों की जांच के बाद दिवंगत लोकतंत्र रक्षकों की पत्नियों को मिल रही सम्मान राशि की भी जांच कराई जा रही है। यहां ऐसे 22 मामले हैं। एडीएम का कहना है कि यदि दिवंगत मीसा बंदी अथवा पत्नी पर आपराधिक मुकदमा पाया जाता है तो उनकी भी पेंशन व सुविधाओं को रोक दिया जाएगा।

इन मीसा बंदियों की रोकी गई पेंशन
जिन मीसा बंदियों की पेंशन रोकी गई है उनमें जमीरूददीन सिददीकी (बांदा), उदयपाल व रामकुमार सिंह (खप्टिहाकलां), अतरवीर सिंह (बदौसा), नौशाद अली (बांदा) शामिल हैं। इनके अलावा घर का दर्ज कराया गया पता सत्यापित न होने पर देवराज (पल्हरी) और लक्ष्मी नरायन (अछरौड़) की पेंशन भी रोक दी गई है।
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