बांदा। अस्तित्व को रहे प्राचीन और ऐतिहासिक तालाबों को बचाने के लिए अब ग्राम पंचायतों में ‘पानी पंचायत’ का गठन होगा। 10 सदस्यीय इस कमेटी में महिलाओं को प्रमुखता दी जाएगी। पानी पंचायत श्रमदान से तालाबों की सफाई कराकर किनारे पौधे लगवाकर रख-रखाव करेगी। यह जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग को सौंपी गई है।
बांदा जनपद में दो हजार से ज्यादा ऐसे तालाब हैं, जो 100 साल से ज्यादा पुराने हैं। लेकिन इनका अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। शासन की मनरेगा से तालाबों की संवारने की कोशिश हो या फिर आदर्श व माडल तालाब बनाने की कोशिश, सभी नाकाम रही हैं। भले ही इनमें करोड़ों रुपये खर्च हो गए हों।
तालाब खत्म होने से भूगर्भ जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। लेकिन अब इन तालाबों को बचाने के लिए ‘पानी पंचायत’ अहम भूमिका निभाएगी। कमेटी का गठन सभी ग्राम पंचायतों में होगा। समिति के सदस्य तालाबों के आसपास रहने वाले ग्रामीण होंगे। इसमें पुरुषों के अलावा महिलाओं की भागीदारी अहम रहेगी।
तालाब की खुदाई मानक के अनुरूप हो, तालाब के किनारे जरूरत के मुताबिक पौधे लगाए जाएं, इसकी जिम्मेदारी पानी पंचायत की होगी। पानी पंचायत में कुम्हार पेशा और मछली पालन से जुड़े लोगों को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा छात्र-छात्राओं को भी इस कमेटी से जोड़ने की कवायद की जा रही है।
इसमें भूजल सेना और ग्राम पंचायत की जल संसाधन समिति का भी सहयोग लिया जाएगा। प्रमुख सचिव मोनिका एस गर्ग ने शासनादेश जारी कर ‘पानी पंचायत’ का गठन करने के निर्देश मुख्य विकास अधिकारी को दिए हैं। सीडीओ ने लघु सिंचाई को यह जिम्मेदारी सौंपी है।
मुख्य विकास अधिकारी रामकुमार सिंह ने कहा कि पानी पंचायत के गठन का उद्देश्य बरसात के पानी का अधिक से अधिक संचय करना, तालाबों की सुरक्षा, पौधरोपण करना, मछली पालन, कुम्हारी कला को बढ़ावा देना व जीवकोपार्जन के साधन विकसित करना है। जल्द ही समितियों का गठन किया जाएगा और उन्हें दायित्व सौंपे जाएंगे।
-ग्राम पंचायत स्तर पर गठित होगी दस सदस्यीय कमेटी
-समितियों में महिलाओं को दी जाएगी प्राथमिकता
-लघु सिंचाई विभाग को शासन ने सौंपी जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो