बांदा। बबेरू के राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय में बच्चों को प्रतिबंधित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खेसारी दाल खिलाई जा रही है। इसका खुलासा पिछले दिनों स्कूल से लिए गए दाल के नमूने की हाल ही में आई जांच रिपोर्ट से हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोषियों के विरुद्ध मुकदमा चलाने के लिए प्रदेश के खाद्य सुरक्षा आयुक्त से स्वीकृति मांगी है।
डीएम के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने 27 अक्टूबर 2018 को जनपद के 12 से अधिक विद्यालयों में बच्चों को परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर इन्हें जांच के लिए लैब भेजा था। अब जांच रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में बबेरू स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय की चने की दाल में प्रतिबंधित खेसारी की दाल की मिलावट पाई गई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि यह गंभीर प्रकरण है। संबंधित दोषियों पर मुकदमा चलाने के लिए प्रदेश के खाद्य सुरक्षा आयुक्त से अनुमति के लिए पत्रावली भेजी गई है। मंजूरी मिलते ही मुकदमे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम की धारा 59 में सजा और जुर्माना दोनों का प्रावधान है। ऐसे मुकदमों को चलाने की अनुमति शासन स्तर पर दी जाती है। गौरतलब है कि खेसारी पर 1990 में प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
खेसारी से फेल हो सकती है किडनी
बांदा। खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि खेसारी दाल स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह है। इसके सेवन से किडनी और लीवर फेल हो सकते हैं। अपंगता व दिल की बीमारी की शिकायतें भी हो सकती हैं। वैज्ञानिकों के तमाम विश्लेषण के बाद शासन ने इसकी बिक्री पर रोक लगाई है।
मिलावट में तीन पर केस
बांदा। मिलावट पाए जाने पर खोवा व्यवसायी कल्लू राम निवासी बबेरू और रामविशाल निवासी पैगंबरपुर (गिरवां) के विरुद्ध एडीएम कोर्ट और मिठाई में केमिकल की मिलावट पाए जाने पर शिवसागर निवासी अतर्रा के विरुद्ध सीएजेए कोर्ट में मुकदमा दायर किया गया है। यह जानकारी खाद्य सुरक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार और नागेश कुमार ने दी।