अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। अरहर की दाल की खेती का गढ़ माने जाने वाले चित्रकूटधाम मंडल में अबकी बुआई काफी पिछड़ गई है, जिससे अरहर का उत्पादन घटने के आसार हैं। स्थिति यह है कि अरहर की बुआई के समय के लिए सिर्फ एक सप्ताह बचा है और अभी भी लगभग 3000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुआई नहीं हो पाई है। कमोबेश यही हाल धान की रोपाई का भी है। इसकी रोपाई भी अभी 10 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में नहीं हो पाई है।
उल्लेखनीय है कि खरीफ सीजन के दौरान चित्रकूटधाम मंडल में कई प्रकार की फसलें बोई जाती हैं, जिनमें तिल, अरहर, धान प्रमुख रूप से हैं, लेकिन इस बार अरहर की बुआई और धान की रोपाई का काम काफी पिछड़ गया है। अभी भी इन दोनों फसलों का 13 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल खाली पड़ा है। बुंदेलखंड के अन्य जिलों की भांति बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा दलहन उत्पादन के लिए मुफीद हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों को देखें तो अबकी अरहर उत्पादन के लिए 69200 हेक्टेयर क्षेत्रफल का आच्छादन लक्ष्य रखा गया है, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया।
इस बाबत कृषि विभाग का कहना है कि बांदा और चित्रकूट में बुआई का काम पूरा हो चुका है, लेकिन हमीरपुर में 20,000 हेक्टेयर के सापेक्ष 18,125 हेक्टेयर एवं महोबा में 6,000 हेक्टेयर लक्ष्य के सापेक्ष 4,709 हेक्टेयर में अभी तक बुआई हो पाई है। यही हाल चित्रकूटधाम मंडल में धान की रोपाई का भी है। 81,136 हेक्टेयर आच्छादन लक्ष्य के सापेक्ष 70,640 हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हुई है, जबकि धान की रोपाई का समय बीत गया। लगभग साढ़े दस हजार हेक्टेयर में नर्सरी का रोपा जाना शेष है। इस बाबत विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती बारिश में विलंब से धान की रोपाई और अरहर की बुआई में विलंब हुआ है।
मानसूनी मौसम में जुलाई माह में बारिश खेती के लिए बेहतर है। कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान वेधशाला प्रभारी एवं शस्य विज्ञान के सह प्राध्यापक डॉ. दिनेश शाह ने बताया कि बांदा जिले में मानसून ने जून माह में किसानों को निराश किया। मात्र 39.4 मिलीमीटर बारिश हुई। अधिकांश किसान खरीफ फसलों की समय से बुआई अभी तक नहीं कर पाए है। जुलाई में कुल 294.4 मिलीमीटर पानी बरसा। यह खेती के लिहाज से काफी अच्छा रहा। इसी तरह अगस्त माह में अब तक 135 मिलीमीटर बारिश हुई है।
बुंदेलखंड की माटी दलहन उत्पादन के लिए बेहद मुफीद है। चित्रकूटधाम मंडल में साढ़े दस लाख हेक्टेयर में 60 फीसदी हिस्सा दाल उत्पादन का है। सितंबर से शुरू होने वाले रबी सीजन में किसानी का मुख्य आधार चना, मटर और मसूर है। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मंडल में लगभग सात लाख किसान परिवार दलहन उत्पादन से जुड़े हैं।
पिछले दो वर्षों में दलहन उत्पादन में वर्ष 2017-18 का उत्पादन औसत दर्जे का रहा। कृषि विभाग के मुताबिक, वर्ष 2016-17 की तुलना में पिछले वर्ष दालों की ज्यादा पैदावार रही है। चालू सीजन में अरहर उत्पादन के लिए आच्छादन क्षेत्रफल में बढ़ोतरी भी प्रस्तावित की गई है, जिससे की इस साल खरीफ में अरहर की दाल की पैदावार बढ़ाई जा सके।
खरीफ में मूंग, उर्द का भी होता है उत्पादन
खरीफ में अरहर प्रमुख फसल है। मूंग, उर्द और सोयाबीन इत्यादि फसलें भी बोई जाती हैं। बांदा और चित्रकूट मुख्य जनपद हैं। खरीफ में कृषि का काफी क्षेत्रफल धान से अच्छादित होता है, लेकिन इन दोनों जनपदों के साथ महोबा व हमीरपुर में मुख्यत: दलहनी फसलें बोई जाती हैं।
बुंदेलखंड की जलवायु व मिटटी दलहनी फसलों के लिए बहुत अच्छी है। बशर्ते बारिश और मौसम अनुकूल रहे। इसमें गड़बड़ी आई तो सीधा असर फसल पर पड़ता है। इस वर्ष बारिश की शुरुआत देरी से होने पर कुछ इलाकों में बुआई में विलंब हुआ है, पर उम्मीद की जाती है कि इसी माह किसान बुआई करके इस लक्ष्य को पूरा कर लेंगे। कृषि विभाग उनके साथ है। -एके सिंह, उप निदेशक (कृषि)
-चित्रकूटधाम मंडल माना जाता है अरहर का गढ़
-अबकी पिछड़ गई बुआई, उत्पादन घटने के हैं आसार