खरीद केंद्रों पर धान का डेढ़ करोड़ रुपये बकाया
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में धान खरीद का लक्ष्य किसानों के बजाए आढ़तियों के जरिये पूरा किया जा रहा है। 31 जनवरी तक 1.52 लाख मीट्रिक टन धान खरीदना है। अभी तक 28 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हुई है। कोहरा व भीषण ठंड के बीच किसान अपना धान बेचने के लिए केंद्रों पर लाइनों में लगे हैं। जबकि आढ़तियों का धान हाथोंहाथ खरीदा जा रहा है। किसानों का खरीद केंद्रों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये बकाया है। इसके लिए उन्हें चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
शासन ने चित्रकूटधाम मंडल में इस साल एक लाख 52 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है। अक्तूबर से धान खरीद केंद्र खोले गए हैं। मंडल में दिसंबर में ही खरीद प्रक्रिया जोर पकड़ती है। इस समय जिले 36 खरीद केंद्रों में धान खरीदा जा रहा है। बांदा जनपद के गिरवां में धान की अच्छी खेती होती है। यहां इस साल महज एक सेंटर खोला गया है। महुआ में आसपास के 30 गांवों से किसानों की भीड़ जुट रही है लेकिन उन्हें कई-कई दिनों तक लाइन में लगना पड़ रहा है। ऐसी ही स्थिति अतर्रा, खुरहंड व नरैनी में है। यहां आढ़तियों का धान धड़ल्ले से खरीदा जा रहा है। किसान डीएम की चौखट पर आए दिन धरना दे रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। उधर, धान खरीद लक्ष्य के सापेक्ष महज 46 फीसदी धान खरीदा गया है।
बांदा में 25,170 और चित्रकूट में 3448 मीट्रिक धान की खरीद हुई। किसानों को नकद भुगतान का दावा भी हवाई साबित हो रहा है। किसानों का करोड़ों रुपया बकाया हो गया है। बांदा में 7.95 करोड़ और चित्रकूट में 10 लाख का बकाया है। किसान आए दिन खाता चेक कर रहे हैं और मायूस हो रहे हैं। पैसा नहीं पहुंच रहा है। मंडल में अभी 46 फीसदी खरीद हो गई। बांदा में नैफेड का सबसे ज्यादा 1.27 करोड़ रुपया, चित्रकूट में एनसीसीएफ का 10 लाख बकाया है। साधन सहकारी समितियां भी किसानों का समय से भुगतान नहीं कर रही हैं। समितियों पर 7.90 करोड़ रुपये के लिए किसान चक्कर लगा रहे हैं।
‘खुश’ करने पर आता है नंबर
बांदा (ब्यूरो)। किसानों को अपना धान बेंचने के लिए केंद्र प्रभारी से लेकर पल्लेदारों तक को खुश करना पड़ता है। चाय-पान से लेकर उनके खाने-पीने की व्यवस्था न करने पर धान तौल का नंबर लटका दिया जाता है। ज्यादा नमी और कचड़ा निकाल दिया जाता है। किसानों को समर्थन मूल्य तो 1560 निर्धारित है। पर इन सबके चक्कर में उन्हें यह 12-1300 रुपये प्रति कुंतल पड़ता है। पल्लेदारी उतराई, छनवाई और कचड़े की कटौती अलग होती है।