बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में ज्यादातर नलकूप दबंग किसानों के कब्जे में है। पाइप से सिंचाई के लिए पानी देने के नाम पर किसानों से प्रति बीघा 100 रुपये सिंचाई की वसूली हो रही है। ज्यादातर नलकूप आपरेटर नदारद रहते हैं।
मंडल में 650 नलकूप हैं। इनमें करीब 300 पंप आपरेटर तैनात हैं। 629 नलकूप बांदा में और 21 चित्रकूट में हैं। एक नलकूप चालक के जिम्मे तीन से चार नलकूप हैं। आपरेटरों को राज्य कर्मियों के बराबर हर माह तनख्वाह मिलती है। फिर भी ये कभी राजकीय नलकूपों में दिखाई नहीं देते।
नलकूपों की रखवाली या सिंचाई किसानों के भरोसे है। उधर, इसका फायदा उठाकर ज्यादातर गांवों में नलकूपों की चाबी वहां के प्रभावशाली या दबंग किसानों ने आपरेटरों से हथिया ली हैं। कई आपरेटर तो दूसरी जगह भी नौकरी करते हैं। इस समय धान की रोपाई का काम तेजी से चल रहा है।
किसानों को खेतों में पानी भरने के लिए प्राइवेट नलकूपों से जुगाड़ करना पड़ रहा है। नलकूप खंड अधिशासी अभियंता लक्ष्मी नारायण ने कहा कि ग्रामीणों को चाबी देने का कोई औचित्य नहीं बनता। जहां से ऐसी शिकायत आएगी, वहां के आपरेटर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उधर, घुरौंडा (महुआ) के किसान ओम प्रकाश अवस्थी व हीरामन आदि का कहना है कि गांव में तीन नलकूप हैं। अलग-अलग आपरेटर हैं। लेकिन वह नहीं आते। एक-दो किसानों को नलकूप की चाबी दे रखी है। वही किसान अपनी मर्जी से नलकूप चलाते हैं और सिंचाई के बदले पैसा वसूलते हैं।
इसी तरह धौसड़ (तिंदवारी) गांव के मोहन तिवारी व महेंद्र पाल आदि का कहना है कि पंप आपरेटर सालों से झांकने नहीं आया। चार नलकूपों में दो खराब हैं। एक नलकूप प्रभावशाली किसान के कब्जे में है। उससे 100 रुपये प्रति बीघा सिंचाई देनी पड़ती है।
-दबंग किसान सिंचाई के बदले कर रहे वसूली
-वेतन ले रहे पर ड्यूटी नहीं दे रहे आपरेटर
अमर उजाला ब्यूरो