बांदा। बारिश में सांपों के काटने का खतरा बढ़ जाता है। बिलों में पानी भरने से सांप बस्ती का रुख करते हैं। सांप काटने के ज्यादातर मामले बारिश में होते हैं। पांच सालों में जिले के 293 लोगों को सर्प ने काटा। 176 की जान चली गई। सावधानी से सर्प के काटने से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है।
पिछले एक सप्ताह से रूक-रूककर बारिश हो रही है। बिलों में पानी भरने से जहरीले सांप बाहर निकल आए हैं। ऐसे में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ रही हैं। दो दिन पहले कालिंजर के गोलेपुरवा गांव में किसान जगन्नाथ गौतम (40) कच्चे मकान का छप्पर ठीक कर रहा था कि जहरीले सर्प ने काट लिया। परिजन सीएचसी लेकर पहुंचे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसी प्रकार अमल्लखपुर गांव में रजिया बेगम (55) घर के दरवाजे पर झाड़ू लगा रही थी। जिसे जहरीले सर्प ने काट लिया। वहीं पिछले वर्ष जुलाई माह में कनवारा की रोहिणी की खाना पकाने के लिए कंडा (उप्पल) निकालते समय सर्प के काटने से मौत हो गई थी। बदौसा की रनिया, बच्चों सहित घर के बाहर लेटी थी। चारपाई में चढ़े सर्प ने दो बच्चों को मौत की नींद सुला दिया। महुआ की रोशनी (14) पशुओं के लिए चारा काटने गई वहीं पर सर्प ने काट लिया। जिला अस्पताल में मौत हो गई।
जागरूकता से कम हो सकती हैं घटनाएं
दैवीय आपदा विशेषज्ञ प्रभाकर का कहना है कि इस सब की वजह लापरवाही रही। सर्तकता के साथ काम किया जाता तो शायद सर्प काटने की घटनाओं से बचा जा सकता है। प्रत्येक गांव में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। मुख्यालय में कंट्रोल रूम खोला गया है। सूचना मिलने पर तत्काल इलाज मुहैया कराया जाता है।