बांदा। मिड डे मील की निगरानी अब खाद्य सुरक्षा विभाग करेगा। हर माह खाने के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजे जाएंगे। मिलावटी या घटिया खाना पाए जाने पर 14 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। शासनादेश के बाद डीएम ने खाद्य सुरक्षा विभाग को यह आदेश जारी कर दिए हैं। 5 सितंबर से नमूने लेने का काम शुरू हो जाएगा।
जिले में करीब 2200 स्कूलों में मिड डे मील बन रहा है। लेकिन गुणवत्ता को लेकर आए दिन शिकायतें हो रही हैं। प्रदेश सरकार के निर्देश पर मिडडे मील प्राधिकरण निदेशक अब्दुल समद ने जिलाधिकारी को भेजे पत्र में मिड डे मील की नियमित निगरानी व निरीक्षण का जिम्मा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को सौंपने को कहा है। बांदा में चार खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात हैं।
हरेक प्रतिमाह 10-10 स्कूलों के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजेंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी कार्रवाई करेंगे। डीएम ने इसके लिए टास्क फोर्स का भी गठन कर दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहीत अधिकारी इसके प्रभारी बनाए गए हैं। बीएसए, एबीएसए और खाद्य सुरक्षा अधिकारी को टीम में शामिल किया गया है। 5 सितंबर से मिड डे मील के साथ इसके आटा, दाल, चावल, तेल, दूध व पानी के नमूने लिए जाने का काम शुरू होगा।
अभिहीत अधिकारी चंद्रशेखर पांडेय ने कहा कि एमडीएम योजना में कोई भी गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने भी भोजन के नमूने लेने के निर्देश दिए हैं। प्रयोगशाला से तीन माह में दो तरह की रिपोर्ट आएगी। असुरक्षित नमूने मिलने पर 14 साल की सजा और अधोमानक (मिलावटी) की रिपोर्ट पर पांच लाख रुपये तक का अर्थदंड लगेगा।
-आज से स्कूलों में लिए जाएंगे खाने के नमूने
-खाद्य सुरक्षा विभाग को सौंपी गई जिम्मेदारी
-शासन के आदेश पर डीएम ने जारी किए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो