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बंदूक के शौक से हटी रोक, पहले दिन 74 आवेदन

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अमर उजाला ब्यूरो
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बांदा। शस्त्र लाइसेंस में रोक हटते ही असलहा शौकीन खुश हो गए हैं। यहां असलहा रखना स्टेट्स सिंबल है। लंबे अरसे से लगी रोक हटने पर लाइसेंस हथियाने की कवायदें शुरू हो गईं। मंगलवार को पहले ही दिन करीब 74 आवेदन जमा किए गए। जिले में पहले ही 11,429 शस्त्र लाइसेंस जारी हो चुके हैं।


समूचे बुंदेलखंड और खासकर बांदा में असलहों का खास क्रेज है। कांधे पर बंदूक या रायफल या कमर में पिस्टल, रिवाल्वर शान समझा जाता है। कोई भी जिलाधिकारी यहां रहा हो उस पर सबसे ज्यादा दबाव शस्त्र लाइसेंस बनाने को लेकर रहता है। लेकिन कुछ सालों से हाईकोर्ट और शासन ने इस पर रोक लगा दी थी। लिहाजा शौकीन खामोश थे। असलहों और कारतूस का कारोबार भी ठंडा था। अब फिर यह बहाल हो गया है। सोमवार को प्रदेश सरकार ने रोक हटा ली है। कुछ और भी संशोधन किए हैं। मंगलवार को यह खबर आते ही शस्त्र शौकीनों के चेहरे खिल गए। कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र लिपिक काउंटर पर आवेदन लेने और आनलाइन की होड़ शुरू हो गई। विभिन्न किस्म के असलहों का लाइसेंस लेने के लिए पहले ही दिन 74 आवेदन जमा हो गए।
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शस्त्र लाइसेंस के लिए पूर्व में लागू की गई शर्तों और पाबंदियों के चलते बुंदेलखंड में लगभग 15 हजार और बांदा जनपद में तकरीबन ढाई हजार आवेदन निरस्त हो गए। अब रोक हटने और शर्तों में ढील के बाद इन आदेवकों को दोबारा आवेदन और औपचारिकता पूरी करनी होगी। शुल्क भी फिर जमा होगा।
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शस्त्र का लाइसेंस या उसका नवीनीकरण दोनों ही अब महंगे हो गए हैं। सरकार ने आयुध नियमावली में संशोधन करते हुए उसमें स्टांप शुल्क लागू कर दिया है। रायफल लाइसेंस नवीनीकरण पर 3000 रुपये शुल्क के अतिरिक्त 750 रुपये स्टांप शुल्क होना होगा। इसी तरह पिस्टल में 1500 शुल्क के साथ 1000 स्टांप शुल्क, डबल बैरल व सिंगल बैरल बंदूक में 1500 रुपये शुल्क के साथ 500 रुपये स्टांप शुल्क देना होगा।


-शस्त्र शौकीनोें ने शुरू कीं लाइसेंस की कवायदें
-बांदा में जारी हो चुके हैं 11,429 लाइसेंस
-शौक हुआ महंगा, शुल्क के साथ स्टांप ड्यूटी भी
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