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छह माह के बच्चे को अतिरिक्त पोषण जरूरी

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बांदा। बच्चा 6 माह यानी 180 दिन का हो जाता है तो उसके लिए स्तनपान ही पर्याप्त नहीं होता। इस समय बच्चा तेजी से बढ़ता है। उसे अतिरिक्त पोषण की जरूरत होती है। जिले के हर आंगनबाड़ी केंद्र पर प्रत्येक माह की 20 तारीख को अन्नप्राशन दिवस मनाया जाता है। इसमें 6 माह की आयु पूरी कर चुके बच्चों को अन्नप्राशन किया जाता है। साथ ही इस माह पैदा होने वाले बच्चों का जन्म दिवस मनाया जाता है। मां और परिवार वालों को पोषण, स्वच्छता और पुष्टाहार आदि की जानकारियां दी जाती हैं।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके गुप्ता के मुताबिक बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शुरू के 1000 दिन यानी गर्भकाल के 256 दिन और बच्चे के जन्म के दो साल (730) का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पोषण का खास ख्याल रखना जरूरी है। सही पोषण से संक्रमण, विकलांगता, बीमारी और मृत्यु की संभावना कम होती है। मां और बच्चे को सही पोषण उपलब्ध कराने से बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

अन्न प्राशन दिवसों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चार रंग के खाद्य पदार्थ (पीला, हरा, लाल और सफेद) बच्चों को खिलाने, मौसमी फल और सब्जियों के सेवन, पौष्टिक पदार्थ जैसे गुड़, शहजन, चना, आंवले के प्रयोग की सलाह दी जाती है। साथ ही अनुपूरक पोषाहार जैसे लड्डू प्रीमिक्स, नमकीन व मीठा दलिया से बने स्वादिष्ट व्यंजनों के बारे में जानकारी दी जाती है।
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बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि छह महीने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ घर में बने पूरक आहार मसलकर देना चाहिए। इनमें खिचड़ी, दलिया, साबूदाना, सूजी की खीर आदि शामिल हैं। मौसमी फल भी देना चाहिए। कहा कि बच्चे को तरल आहार न देकर अर्ध ठोस पदार्थ दें और स्तनपान जारी रखें।

उम्र के अनुपात में कम लंबाई सबसे ज्यादा बांदा में
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के अनुसार 6 से 23 माह के बच्चे, जिन्हें पर्याप्त आहार मिल पाता है उनका बांदा में प्रतिशत मात्र 2.7 है, जबकि प्रदेश में यह आंकड़ा 5.3 है। इसी तरह 5 वर्ष तक के बच्चे जिनकी लंबाई उम्र के अनुपात में कम है पूरे प्रदेश में सर्वाधिक बांदा में हैं। इनका यहां प्रतिशत 46.7 है, जबकि प्रदेश का 46.3 फीसदी है। 5 वर्ष तक के कम वजन वाले बच्चे बांदा में 18 फीसदी हैं। प्रदेश में इनका आंकड़ा 70.9 फीसद है। इसी तरह 5 वर्ष तक की आयु के बच्चे, जिनमें खून की कमी पाई गई है उनका आंकड़ा बांदा में 62.7 प्रतिशत है, जबकि प्रदेश में यह 63.2 प्रतिशत है।

खानपान के अभाव में 50 फीसदी बच्चे अविकसित
रैपिड सर्वे ऑफ चिल्ड्रेन के आंकड़े बताते हैं कि सही खानपान के अभाव में प्रदेश के 50.4 प्रतिशत बच्चे अविकसित, 10 फीसदी बच्चे कमजोर और 34.3 प्रतिशत बच्चे कम वजन के रह जाते हैं।
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