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नहले पे दहला की तर्ज पर बाल कुमार ने की बगावत

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बांदा। नहले पे दहला की तर्ज पर बाल कुमार पटेल ने जवाबी हथकंडा अपनाकर कांग्रेस में शामिल होकर टिकट भी हासिल कर लिया। सपा से उनकी दावेदारी पर भाजपा के श्यामाचरण गुप्त ने सेंधमारी कर बांदा से सपा का टिकट हथिया लिया है। शुक्रवार को दिल्ली में कांग्रेस में शामिल होने के चंद घंटे बाद ही देर रात बाल कुमार को बांदा-चित्रकूट संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। बाल कुमार के इस दांव से गठबंधन प्रत्याशी श्यामाचरण के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
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बाल कुमार पटेल यूं तो पाठा क्षेत्र के दुर्दांत दस्यु सरगना रहे ददुआ के सगे भाई हैं, लेकिन राजनीति में उन्होंने शोहरत हासिल कर ली। वर्ष 2009 में सपा के टिकट पर मिर्जापुर से लोकसभा का चुनाव लड़े और जीतकर सांसद बने। अगले चुनाव 2014 में अपना चुनाव क्षेत्र बदलकर बांदा-चित्रकूट सीट से सपा का टिकट लिया और चुनाव लड़ा। 1,89,730 वोट पाने के बाद भी वह तीसरे नंबर पर रहे। भाजपा के भैरो प्रसाद मिश्र 3,42,066 वोट पाकर चुनाव जीत गए। दूसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी आरके सिंह पटेल रहे, उन्हें 2,26,278 वोट मिले।

इस बार भी वर्ष 2019 के चुनाव में बाल कुमार सपा के मजबूत दावेदार थे। उन्हें पूरा भरोसा था कि गठबंधन प्रत्याशी के रूप में बांदा-चित्रकूट से वही चुनाव लड़ेंगे। अतिविश्वास में लबरेज बालकुमार ने सपा प्रत्याशी के रूप में अपना प्रचार भी शुरू कर दिया था। बैनर, होर्डिंग्स, वाल पेंटिंग करा डाली थी, लेकिन 16 मार्च को अचानक तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम में भाजपा के प्रयागराज से सांसद श्यामाचरण गुप्त लखनऊ में सपा में शामिल हो गए। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उसी समय उन्हें बांदा-चित्रकूट सीट से सपा का प्रत्याशी भी घोषित कर दिया। इस अप्रत्याशित घटना से बाल कुमार को गहरा झटका लगा। उन्होंने नहले पे दहला की तर्ज पर छठवें ही दिन कांग्रेस में शामिल होकर टिकट भी हथिया लिया।
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सियासी गलियारों में चर्चा है कि बाल कुमार का यह दांव गठबंधन प्रत्याशी का समीकरण बिगाड़ सकता है। पिछली बार टिकट कटने से खफा होकर भाजपा में चले गए श्यामाचरण के फिर टिकट के साथ आ जाने से सपा और बसपा के अंदरूनी तौर पर नाखुश कार्यकर्ता बाल कुमार के खेमे में जा सकते हैं। हालांकि सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी का कहना है कि गठबंधन प्रत्याशी के चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। गठबंधन की जीत होगी।
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