बांदा। गांवों में रोजगार मुहैया कराने के दावे कुछ भी हों लेकिन धरातल में हकीकत दूसरी है। मनरेगा समेत किसी भी योजना से गांवों में रोजगार नहीं मिल पा रहा। यही वजह है कि रोजी-रोटी की तलाश में यहां से महानगरों को पलायन कर गए हजारों मजदूर परिवार बरसात में भी परदेस से घर नहीं लौटे। उनके घरों में ताले पड़े हैं। हाल ही में गांव-गांव में कई पल्स पोलियो प्रतिरक्षण टीमों ने 12 हजार से ज्यादा घरों में ताले पाए।
बारिश में महानगरों में मजदूरी का काम ज्यादातर बंद हो जाता है। ऐसे में हर साल यहां से पलायन करने वाले मजदूर परिवार बरसात के दिनों में वापस वतन (गांव) लौट आते हैं। उन्हें अपने कच्चे खपरैलदार मकानों और झुग्गी-झोपड़ियों को बारिश से बचाने की भी चिंता रहती है।
लेकिन इस वर्ष गांवों में रोजगार योजनाएं लगभग ठप होने से मजदूरी के कोई आसार नजर न आने पर हजारों परिवार बारिश में भी वापस नहीं आए। जुलाई माह में चले सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान की टीमों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि पूरे जनपद में 12,048 घरों में परिवार नहीं मिले।
इनके फिलहाल जल्दी लौटने की कोई सूचना नहीं है। इनमें सबसे ज्यादा 1990 परिवार नरैनी क्षेत्र के हैं। बबेरू क्षेत्र में 1556, बिसंडा में 1475, तिंदवारी में 1458, जौरही में 1253, कमासिन में 1142, महुआ में 1079, बांदा में 939, अतर्रा में 170 और जसपुरा में 946 घरों में ताले मिले।
-पल्स पोलियो प्रतिरक्षण टीमों ने 12 हजार से ज्यादा घरों में ताले पाए
-रोजगार की तलाश में गए थे, हर साल बरसात में आ जाते थे वापस
अमर उजाला ब्यूरो