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हड़ताल से 1500 टन खाद नहीं बंट पाई

Fri, 16 Nov 2018 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
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पीसीएफ शाखा के बाहर खाद के लिए किसानों का जमघट। - फोटो : अमर उजाला
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सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल रबी की फसल के लिए खाद को लेकर परेशान किसानों के ऊपर आफत बनकर टूट रही है। प्रारंभिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (पैक्स) में मांगों को लेकर सचिवों की हड़ताल के चलते केवल बांदा जिले में ही 1000 टन डीएपी, 500 टन यूरिया खाद का वितरण नहीं हो पा रहा। बताया जाता है कि यह खाद गोदामों में ही डंप पड़ी है। इतना ही नहीं विभाग भी खाद बंटवाने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। इसके अलावा 600 क्विंटल गेहूं का बीज भी वितरित नहीं हो पा रहा। खाद न मिल पाने की वजह से अब किसानों का गुस्सा भी फूटने लगा है।

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जिले में 46 पैक्स समितियों से खाद और बीज बांटा जाता है। मौजूदा समय में रबी की फसल की बुआई का मौसम होने के चलते किसानों को खाद की सख्त दरकार है। ऐसे मौके पर समितियों के सचिव हड़ताल पर हैं। समिति के गोदामों में रबी की फसल के लिए भेजी गई डीएपी, यूरिया और गेहूं का बीज वितरित नहीं हो पा रहा। जो किसान समितियों के सदस्य हैं, उन्हें खाद के संकट से जूझना पड़ रहा है। जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियां वीरेंद्र बाबू दीक्षित ने बताया कि सचिवों की हड़ताल समाप्त होने के बाद खाद का वितरण कराया जाएगा।

उधर, तिंदवारी पीसीएफ शाखा में शुक्रवार तड़के से ही खाद के लिए आए किसानों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा, घंटों लाइन लगाने के बाद भी उनको खाद नहीं मिली। खाद लेने के लिए बड़ी संख्या में महिला किसान भी पीसीएफ केंद्र आईं हुईं थीं। केंद्र प्रभारी द्वारा किसानों को सिर्फ दो बोरी खाद देने की घोषणा पर किसानों का पारा चढ़ गया और हंगामा करने लगे। हंगामे की सूचना पर थाने का पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंचा और किसी तरह से किसानों को शांत किया। इस दौरान अफरातफरी के बीच गिने-चुने किसानों को ही खाद मिल सकी। जिले की पैक्स समितियों में रबी सीजन (पहली अक्टूबर से 31 मार्च तक) में 20,379 टन खाद वितरित की जानी है। इसमें 11,887 टन यूरिया और 8492 टन डीएपी शामिल है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से पहले तक 1221 टन यूरिया और 2371 टन डीएपी बांटी जा चुकी है।
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एक लाख किसान हैं समितियों के सदस्य
पैक्स समितियों से लगभग एक लाख सदस्य (किसान) जुड़े हैं। सहायक निबंधक सहकारी समितियां ने बताया कि समितियों से लेनदेन करने वाले किसान सक्रिय श्रेणी में शामिल रहते हैं। इन्हीं सदस्यों को रबी और खरीफ की फसल में कर्ज पर खाद एवं बीज दिया जाता है।


चहेतों को खाद बांटने पर किसानों का हंगामा
तिंदवारी पीसीएफ शाखा में शुक्रवार तड़के से ही खाद लेने के लिए आए किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। घंटों लाइन लगाने के बाद भी खाद नहीं मिली। केंद्र प्रभारी द्वारा किसानों को सिर्फ दो बोरी खाद देने की घोषणा करने पर किसान भड़क गए। हंगामे की खबर पाकर थाने का पुलिस फोर्स आ गया और किसानों को शांत किया। अफरातफरी के बीच गिने-चुने किसानों को ही खाद हाथ लगी। किसानों ने आरोप लगाया कि चहेतों को खाद दी जा रही है। बताया जाता है कि केंद्र प्रभारी ने काफी देर बाद शाखा खोली, जबकि किसान सुबह से ही लाइन लगाकर खड़े हुए थे।

ब्रांच खुलते ही कुछ लोगों को ही वितरण के बाद खाद खत्म हो जाने की घोषणा कर दी गई। बमुश्किल एक घंटे खाद बांटी गई। नगर पंचायत में क्षेत्र में उत्तरी और दक्षिणी सहकारी समितियां, पीसीएफ शाखा और सहकारी संघ लिमिटेड के चार केंद्र हैं। खाद सिर्फ पीसीएफ शाखा में ही नाम मात्र को आई। वहीं दूरदराज से खाद लेने आई महिला किसान शिमला, राजाबाई, कलमतिया, सियादुलारी ने आरोप लगाया कि केंद्र प्रभारी ने सिर्फ अपने चहेतों को खाद बांटकर स्टॉक खत्म होने की घोषणा कर दी। कहा कि एक तरफ बिजली संकट तो दूसरी तरफ खाद की मार किसानों पर पड़ रही है। उधर, केंद्र प्रभारी देव कुमार फौजी ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि जितनी खाद उपलब्ध थी वो बांट दी गई है। कहा कि अगली
खेप आने पर फिर वितरित की जाएगी।

खाद न मिलने से किसान परेशान
फतेहगंज के डढ़वामानपुर सोसाइटी में 15 दिनों से किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल रही। इस बाबत क्षेत्रीय किसानों ने बताया कि 18 से 20 किलोमीटर दूर बदौसा से 1400 से 1500 रुपये में खाद की बोरी खरीदनी पड़ रही है। किसानों ने समितियों से खाद बंटवाने की मांग की है।

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