बांदा। तवे की तरह तप रहे चित्रकूटधाम मंडल की नदियां तेजी से सिकुड़ गई हैं और इनमें ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है। मंडल मुख्यालय की केन नदी में ऑक्सीजन की मात्रा 5.4 डीओ (डिजॉल्व ऑक्सीजन) है। यह मंडल की अन्य नदियों के मुकाबले एक बिंदु कम है। ऑक्सीजन की मात्रा 4 से कम हुई तो जल के जीव-जंतुओं का जीवन खतरे में पड़ जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण विभाग कर्मियों के अनुसार नदियों का जल स्तर कम होने से भी ऑक्सीजन पर असर पड़ा है।
अच्छे बहाव और किनारों तक लबालब नदियों में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा अच्छी रहती है। इन दिनों भीषण गर्मी से नदियां काफी सिकुड़ गईं। दोनों किनारों से पानी सिमटने पर केन नदी का जल स्तर लगभग 110 फिट कम हो गया। नदी के प्रवाह पर भी असर पड़ा। इससे पानी में घुलित ऑक्सीजन कम हो गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक अप स्ट्रीम (नदी में नाला मिलने के पहले) में केन नदी में घुलित ऑक्सीजन 5.4 है।
डाउन स्ट्रीम (नाला-नाली मिलने के बाद) 5.3 है। यहां केन पुल और हरदौली घाट के पास पानी में ऑक्सीजन की मात्रा नापी जाती है। चित्रकूट की मंदाकिनी नदी में 6.1 (अप) व 5.9 (डाउन) और हमीरपुर जनपद में यमुना नदी में 6.2 (अप) व 6.1 (डाउन) तथा बेतवा में 6.4 (अप) व 6.2 (डाउन) डीओ है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (क्षेत्रीय कार्यालय) में वैज्ञानिक सहायक रामदास ने बताया कि पानी घुलित ऑक्सीजन भरपूर होने से जल के जीव-जंतुओं को श्वांस लेने में दिक्कत नहीं होती। स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 4 डीओ से कम होने पर जीव-जंतुओं को श्वांस लेने में परेशानी होने लगती है।
मरने का खतरा हो जाता है। हर माह चारों नदियों में पानी का नमूना लेकर ऑक्सीजन नापा जाता है। फिलहाल मंडल की सभी नदियों में निर्धारित मानक से कम ऑक्सीजन नहीं पाया गया। अन्य नदियों के मुकाबले केन नदी में डीओ कम है।
- केन नदी में 5.4 ऑक्सीजन, 4 से कम होने पर खतरा
- जल स्तर कम होने से भी ऑक्सीजन पर असर पड़ा है