बांदा। लोकसभा चुनाव में चित्रकूटधाम मंडल में विरासत की सियासत का भूत सिर चढ़कर बोल रहा है। यह लगभग हर प्रमुख दल में नजर आ रहा है। राजनीति के पुरोधा अपने खुद के साथ ही विकल्प के रूप में कुनबे को पेश कर रहे हैं। कोई नेता बेटे को आगे बढ़ा रहा है तो कोई भाई की पीठ थपथपा रहा है। बांदा और हमीरपुर दोनों ही संसदीय सीट क्षेत्रों में लगाई गई होर्डिंग्स कुनबा परस्ती की सियासत का साफ संदेश दे रही है।
पिछले काफी दिनों से मुख्यालय सहित गांव और कस्बों में तथा प्रमुख सड़कों के किनारे लगी होर्डिंग्स में किसी पर पिता-पुत्र तो किसी पर भाई-भाई की तस्वीरें और नारे नजर आ रहे हैं। चर्चाओं में इसे यूं लिया जा रहा है कि हम नहीं तो हमारा कुनबा। हालांकि कुछ मामलों में राजनीतिज्ञ अपने साथ अपने परिवार के किसी सदस्य को भी सियासत की राह में हमसफर बनाना चाह रहे हैं।
विरासत की इस सियासत में भाजपा, सपा, कांग्रेस जैसे प्रमुख दल शामिल हैं। अंदरुनी तौर पर यह दिग्गज खुद के साथ बेटे या भाई के लिए भी टिकट की पैरोकारी कर रहे हैं। जगह-जगह लगीं होर्डिंग्स उनकी इस मंशा को सार्वजनिक कर रही हैं। बांदा-चित्रकूट और हमीरपूर-महोबा-तिंदवारी लोकसभा क्षेत्रों में यह नजारा साफ देखा जा रहा है।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य विशंभर प्रसाद निषाद अपना सियासी हमसफर बेटे विवेक निषाद को बनाते दिखाई पड़ रहे हैं। वह हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी सीट से बेटे को टिकट चाहते हैं। निषाद तिंदवारी से खुद भी विधायक रहे हैं। हालांकि बेटा विवेक इससे पहले राजनीति में नहीं था।
वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करता रहा है। निषाद के घर से लेकर तिंदवारी क्षेत्र में कई जगह पिता-पुत्र की संयुक्त होर्डिंग्स लगी हुई हैं। इसी तरह सपा के ही पूर्व विधायक विशंभर सिंह यादव अपने पुत्र वरुण यादव को सियासत की विरासत देने की जुगत में नजर आ रहे हैं। यादव के परिवार में बड़ी संख्या में लोग महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। बेटे वरुण की पत्नी तिंदवारी की मौजूदा ब्लाक प्रमुख भी हैं। पिता-पुत्र की संयुक्त होर्डिंग्स जगह-जगह लगी हैं।
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक दलजीत सिंह हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लडने के मूड में हैं। उनकी पकड़ भी ठीकठाक है। दलजीत सिंह के साथ उनके बड़े भाई दलपत सिंह लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी होर्डिंग्स भी जगह-जगह कुछ संदेश दे रही हैं।
हमीरपुर-महोबा और तिंदवारी में स्वास्थ्य शिविर आदि लगाकर दलपत चुनावी दांव में लगे हुए हैं। हालांकि उनके बारे में अभी राजनीतिक दल की स्थिति स्पष्ट नहीं है। भाजपा के पूर्व विधायक राजकुमार शिवहरे भी बेटे स्वदेश शिवहरे गोलू को सियासी समर में लाने के इच्छुक हैं। उनकी भी कई होर्डिंग्स इस बात का इशारा दे रही हैं।
कुनबे को बनाना चाहते हैं अपना राजनीतिज्ञ हमसफर
बाप-बेटे को और भाई-भाई को दे रहे बढ़ावा
जगह-जगह होर्डिंग्स के जरिये संदेश
अमर उजाला ब्यूरो