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धोखाधड़ी के पांच लाख तक के मामले में न्याय शुल्क माफ

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बांदा। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में पांच लाख रुपये तक के धोखाधड़ी मामलों में अब कोई न्याय शुल्क नहीं लगेगा। इसके पहले एक लाख रुपये तक में 100 रुपये और पांच लाख तक के मामलों में 200 रुपये न्याय शुल्क लिया जाता था।
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5 लाख से 10 लाख रुपये तक के प्रकरणों में शुल्क आधा कर दिया गया है। यह 400 रुपये के स्थान पर 200 रुपये लगेगा। 10 से 20 लाख तक पर 100 रुपये की रियायत मिली है। इसमें अब 500 के स्थान पर 400 रुपये न्याय शुल्क लगेगा। शासनादेश प्राप्त होने के बाद उपभोक्ता फोरम में यह नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।

केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में संशोधन किया है। अब पांच लाख तक की धोखाधड़ी के केस में न्याय शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया गया है। अध्यक्ष उपभोक्ता फोरम को शपथ पत्र के साथ दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र में मुकदमे की सुनवाई होगी।
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इस संबंध में केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव अमित मेहता ने सभी जिलाधिकारियों व अध्यक्ष उपभोक्ता फोरम को शासनादेश जारी किया है। गौरतलब है कि चित्रकूटधाम मंडल में पिछले एक साल में 146 धोखाधड़ी के मामले उपभोक्ता फोरम अदालत में दायर किए गए। इसमें सौ से अधिक मामले सिर्फ आनलाइन खरीद से संबंधित थे। जिला उपभोक्ता फोरम के प्रभारी अध्यक्ष रामकैलाश का कहना है कि शासनदेश प्राप्त हो गया है। नए शुल्क लागू कर दिए गए हैं।
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