बांदा। ग्रामीण क्षेत्रों में रिबोर के लिए चिह्नित किए 1342 हैंडपंपों में जल निगम ने अब तक सिर्फ 26 का ही रिबोर किया है। उधर, गर्मी पूरे परवान पर है। प्रभावित इलाकों में पेयजल संकट है। उधर, जल निगम अधिशासी अभियंता ने रिबोर की गेंद की ग्राम पंचायतों के पाले में डाल दी है। कहा है कि जल निगम सिर्फ सत्यापन करेगा।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 2,88,979 स्थापित हैंडपंपों में 9170 खराब पड़े हैं। 1489 हैंडपंप करीब साल भर से रिबोर की आस में ठप पड़े हैं। इसके अलावा 7,681 हैंडपंप मामूली खराबी के चलते पानी नहीं दे रहे। बबेरू ब्लाक में सर्वाधिक 1235 हैंडपंप खराब हैं। इनमें 176 का रिबोर होना है। बड़ोखर ब्लाक में 1025 में 96, बिसंडा में 820 में 168 रिबोर का इंतजार कर रहे हैं।
कमासिन में 1095 में 223 का रिबोर होना है। महुआ में 1319 में 269, जसपुरा में 561 में 103, नरैनी में 1262 में 212 और तिंदवारी में 1853 में 240 हैंडपंप रिबोर होने है। जल संस्थान के 114 हैंडपंपों के रिबोर होना है। इन हैंडपंपों की सूची जिला पंचायत राज विभाग ने अप्रैल माह में जल निगम को भेज दी थी। निगम ने सिर्फ 26 हैंडपंपों का ही रिबोर किया है। उधर, जल निगम के अधिशासी अभिंयता गौरव चौधरी ने रिबोर की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों पर बताई है। उनका कहना है जल निगम का काम सत्यापन करना है। रिबोर ग्राम पंचायतों को कराना है।