बांदा। खाद में खेल से किसानों के साथ हो रही भारी धोखाधड़ी का प्रदेश के गुणवत्ता नियंत्रण विभाग (कृषि) ने खुलासा कर दिया है। जांच में डीएपी खाद मानक पर खरी नहीं उतरी।
इसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस कम पाए गए हैं। संयुक्त कृषि निदेशक ने जिला कृषि अधिकारी को खाद बांटने वाली संबंधित फर्म के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने और उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकांश किसान डीएपी का प्रयोग कर ही फसल उगाते हैं। उन्हें यह खाद मुख्य रूप से कृषि और सहकारिता विभाग अपनी एजेंसियों के माध्यम से उपलब्ध कराते हैं। किसान अपनी गाढ़ी कमाई से खाद खरीदता है, लेकिन खाद में जो खेल हो रहा है, उसका अब खुलासा हुआ है।
पिछले वर्ष 31 अक्तूबर को प्रदेश के कृषि निदेशालय में स्थित गुणवत्ता नियंत्रण अनुभाग ने बांदा जिले में बेची जा रही डीएपी खाद के नमूने लिए थे। लखनऊ स्थित उर्वरक एवं कीटनाशी गुण नियंत्रण प्रयोगशाला में जांच हुई। जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली है।
कृषि निदेशालय में संयुक्त कृषि निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण) एसबी सिंह ने जिला कृषि अधिकारी को भेजे पत्र में कहा है कि जांच में डीएपी खाद में नाइट्रोजन 18 फीसदी के स्थान पर 16.5 और फास्फोरस 46 के स्थान पर 45 फीसदी पाया गया है। इस खाद को अमानक घोषित किया गया है।
संयुक्त कृषि निदेशक ने कृषि अधिकारी से कहा है कि जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया है कि यहां संबंधित फर्म द्वारा अमानक खाद का वितरण किया जा रहा है। कृषि अधिकारी को निर्देश दिया है कि संबंधित फर्म के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कराकर और उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के अनुसार कार्रवाई करते हुए एफआईआर और की गई कार्रवाई की फोटो प्रतियां निदेशालय को तत्काल भेजें। उधर, इस बाबत उप निदेशक (कृषि) एके सिंह ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है। जांच चल रही है। एक-दो दिन बाद ही एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।