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200 मदरसा छात्रों के सिर बंधी पगड़ी

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बांदा। दारूल उलूम रब्बानिया के 13वां जलसा दस्तारबंदी (दीक्षांत समारोह) में दो सैकड़ा से ज्यादा तलबा (छात्रों) को उनका कोर्स पूरा होने पर डिग्री (सनद) सौंपी गईं। उलेमाओं ने उनके सिर पर पगड़ी बांधी और फूलों की माला पहनाई।
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शनिवार की रात नरैनी रोड स्थित जामिया अरबिया के सजे-धजे ग्राउंड में जलसा हुआ मदरसे के बच्चों ने हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, फारसी, अरबी, बुंदेलखंडी और बंगला भाषाओं में तकरीरें (संबोधन) कीं। मौलाना अमीनुल कादरी (मालेगांव) ने कहा कि नबी की मोहब्बत में जो नींद भी न कुर्बान कर सके वह आशिके रसूल नहीं हो सकता।

इंकलाब अमल से आता है। जलसों और कान्फ्रेंसों से नहीं। मौलाना तौसीफ रजा खां (बरेली) ने कहा कि दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी (मदरसा) पैगंबरे इस्लाम ने ही कायम कराई थी। मौलाना सैय्यद आलमगीर (किछौछा) ने अहलेबैत का जिक्र किया। जलसे में कई मशहूर शायरों ने नातिया कलाम पेश किए।
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जलसे की सरपरस्ती और सदारत अल्लामा सैय्यद गाजी रब्बानी ने की। मौलाना कौसर रब्बानी ने कयादत की। निजामत (संचालन) मौलाना खुश्तर रब्बानी ने किया। सैय्यद अनवर रब्बानी, सैय्यद शाहिद रब्बानी, सैय्यद मेराज मसूदी उर्फ अकील मियां, सैय्यद राशिद मियां, सैय्यद अबरार अहमद आदि शरीक रहे।
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जलसा दस्तारबंदी में सौंपी गई सनद
मदरसा दारूल उलूम रब्बानियां का दीक्षांत समारोह
उलेमा बोले, अमल से आता है इंकलाब
अमर उजाला ब्यूरो
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