अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। कृषि विश्वविद्यालय समेत कई संस्थानों व कंपनियों में शांति व सुरक्षा के तहत लगाए गए प्रांतीय रक्षक दल जवानों की ड्यूटी में जीएसटी रोड़ा बन रही है। संबंधित विभागों व संस्थानों से भुगतान के लिए जीएसटी का बिल मांगा जा रहा है। पीआरडी महानिदेशक ने जवानों की ड्यूटी को जीएसटी के दायर से बाहर रखने को कहा है।
जनपद में जिला युवा कल्याण विभाग के माध्यम से डीएम के निर्देश पर 175 जवानों की ड्यूटी विभिन्न शैक्षिक संस्थानों, नगर पालिका, कृषि विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, मंडी समिति, महिला थाना आदि में लगी है। इन्हें 250 रुपये प्रतिदिन की दर से ड्यूटी भत्ते का भुगतान संबंधित विभाग व कंपनियों द्वारा किया जाता है लेकिन अब जीएसटी लागू होने के बाद से भुगतान के लिए जिला युवा कल्याण अधिकारी से जीएसटी नंबर की मांग की जा रही है। ऐसे में कई जवानों के ड्यूटी भत्ते पर संस्थानों ने रोक लगा दी है।
प्रदेश के प्रांतीय रक्षक दल महानिदेशक रमेश मिश्र ने जिला युवा कल्याण अधिकारी को भेजे पत्र में कहा कि जवानों को निर्धारित मासिक भुगतान किया जाता है। विभाग द्वारा कोई व्यापार नहीं किया जाता। ड्यूटी भत्ता से जीएसटी काटे जाने का कोई औचित्य नहीं है। उधर, जिला युवा कल्याण अधिकारी रवींद्र कुमार पटेरिया का कहना है कि संस्थानों में कई-कई माह तक भुगतान नहीं किया जाता है। ऐसे में भत्ते की धनराशि इकट्ठा होकर 8-10 लाख हो जाती है। इसमें विभागों व संस्थानों द्वारा जीएसटी नंबर मांगा जा रहा है। निदेशालय को इससे अवगत कराया गया था।
-भुगतान के लिए मांगा जा रहा जीएसटी नंबर
-महानिदेशक ने भत्ते को बताया जीएसटी से बाहर