बांदा। बिना मान्यता के ‘आवासीय’ विद्यालय गली-मोहल्लों में बेधड़क चल रहे हैं। अफसर भी इन स्कूलों की तरफ से नजरें फेरे हैं। हैरत की बात यह है कि अधिकांश संचालित आवासीय विद्यालयों में मानक भी पूरे नहीं हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों में मात्र दो आवासीय विद्यालय ही दर्ज हैं। उधर, जिला विद्यालय निरीक्षक ने माध्यमिक शिक्षा परिषद को पत्र भेजकर आवासीय विद्यालयों से संबंधित शासनादेश मंगाया है।
जिले में लगभग दर्जन भर आवासीय विद्यालय संचालित हैं। शहर में बिजली खेड़ा, खाईंपार, अतर्रा रोड, केवटरा आदि इलाकों में बिना मान्यता के आवासीय विद्यालय धड़ल्ले से चल रहे हैं। सभी में आधा सैकड़ा से ज्यादा छात्र-छात्राओं के ठहरने की व्यवस्था है। जबकि किसी स्कूल के पास अध्ययनरत छात्रों के ठहरने की मान्यता नहीं है। न ही अब तक शिक्षा विभाग अधिकारियों ने इनकी सुध ली।
कभी हादसा हो जाए तो जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा। इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक हिफजुर्रहमान ने बताया कि जिले में मात्र दो विद्यालयों को आवासीय मान्यता मिली हुई है। इनमें बूटूबाई आवासीय विद्यालय, अतर्रा और महारानी लक्ष्मीबाई आवासीय विद्यालय, शुकुलकुआं शामिल हैं। इसके अलावा किसी स्कूल की आवासीय मान्यता नहीं है। उन्होंने स्वीकारा कि जिले में कई विद्यालय ‘आवासीय’ नाम से चल रहे हैं। लेकिन इनकी मान्यता मात्र अध्ययन की है। बच्चों को रोकना गैरकानूनी है।
डीआईओएस ने बताया कि हाल ही में माध्यमिक शिक्षा परिषद (इलाहाबाद) सचिव को इसके लिए पत्र भेजा गया है। आवासीय विद्यालय का शासनादेश उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है। आवासीय विद्यालय के लिए पीडब्ल्यूडी से भवन सत्यापन रिपोर्ट, फायर स्टेशन द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र, जमीन के अभिलेख और मानक मुताबिक कमरे होने चाहिए।
उधर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीपी सिंह ने भी जिले में जूनियर हाईस्कूलों में आवासीय विद्यालयों की मान्यता से इनकार किया है। बताया कि आवासीय विद्यालय जिले में सिर्फ दो हैं। कहा कि यहां वह नए हैं। आवासीय समेत सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची तैयार कर जांच कराएंगे। बिना मान्यता के स्कूल संचालित मिला तो उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराएंगे।
-गली-कूचों में चल रहे आवासीय स्कूल
-डीआईओएस ने माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो