बांदा। बैंकों की लापरवाही से प्रदेश सरकार की फसली ऋण मोचन योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। डीएम की कोशिशों के बावजूद योजना के लिए चयनित 99,302 किसानों में सिर्फ 57,360 की भूलेख मैपिंग और फीडिंग हो सकी है। इनमें इलाहाबाद बैंक और इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के साथ पंजाब नेशनल बैंक भी लापरवाह है। सीडीओ ने बैंक प्रबंधकों को नोटिस जारी कर 12 घंटे में 100 फीसदी फीडिंग के निर्देश दिए हैं।
ऋण मोचन योजना के तहत जनपद के 99,203 लघु व सीमांत किसानों का बैंक लोन माफ किया जाना है। योजना में लाभान्वित होने वाले किसानों की भूलेख मैपिंग और आधार फीडिंग कराई जानी है। इसकी जिम्मेदारी बैंकों को सौंपी गई है। 22 जुलाई को फीडिंग की अंतिम तिथि निर्धारित है।
23 जुलाई को वेबसाइट बंद हो जाएगी। पोर्टल बंद होने से किसानों की फीडिंग हो पाना संभव नहीं होगा। बिना आधार लिंक व भूलेख मैपिंग के किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। प्रदेश सरकार ने फसली ऋण मोचन योजना छोटे किसानों के सतत विकास के लिए शुरू की है।
लेकिन इसमें बैंकों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। मुख्य विकास अधिकारी रामकुमार सिंह ने 22 जुलाई को नोडल बैंक अधिकारियों की मीटिंग में प्रगति की समीक्षा की तो रिपोर्ट चौंकाने वाली रही। महज 58 फीसदी चयनित किसानों की फीडिंग हो पाई है।
सीडीओ ने इस पर नाराजगी जाहिर कहा कि इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक और इलाहाबाद बैंक प्रबंधक सभी शाखाओं में फीडिंग की समीक्षा करते हुए कंप्यूटर पर कार्य करने वाले कर्मियों की संख्या बढ़ाएं। 12 घंटे में सभी किसानों की फीडिंग करें। 23 जुलाई को स्टेट एनआईसी भूलेख मैपिंग को बंद व लॉक कर देगी।
किसी भी तरह की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। डाटा फीडिंग में गलती मिली तो संबंधित शाखा प्रबंधक पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सह सचिव व जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव को योजना में प्रगति की निगरानी का जिम्मा सौंपा है।
-फीडिंग में देरी पर सीडीओ ने बैंक प्रबंधकों को दी नोटिस
-शाखा प्रबंधकों की लापरवाही से सिर्फ 58 फीसदी फीडिंग
अमर उजाला ब्यूरो