बांदा। पंचायत और ग्राम प्रधानी का चुनाव भी पलायित मजदूरों को अपने गांव वापस नहीं ला सका। पेट की आग बुझाने का जुगाड़ वोटों पर भारी पड़ा। चुनाव के दौरान भी साढ़े 12 हजार से ज्यादा परिवार घरों को नहीं लौटे। उनके घरों में ताले पड़े रहे। चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का मतदान के लिए गांव आने का न्योता ठुकरा दिया।
अक्तूबर से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, जो प्रधानी के चुनाव के बाद दिसंबर में खत्म हुई। सूखे के कारण लाखों खेतिहर मजदूर रोजी-रोटी के लिए महानगरों को पलायन कर गए हैं। लोकसभा या विधानसभा चुनाव में पलायित परिवार भले ही न आए लेकिन प्रधानी के चुनाव में प्रत्याशियों के दबाव और आरजू-मिन्नत के चलते जरूर लौट आते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
बुंदेलखंड में पड़े जबर्दस्त सूखे के हालात ने इन मजदूरों की वोट से दिलचस्पी खत्म कर दी। प्रत्याशियों ने तमाम लालच, किराया-भाड़ा आदि का प्रलोभन देकर इनको बुलावा भेजा। तमाम मजदूर आए भी, लेकिन साढ़े 12 हजार से ज्यादा मजदूर परिवार नहीं आए।
यह खुलासा सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम के तहत हाल ही में हुए सर्वे में हुआ। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पोलियो ड्राप पिलाने गईं थीं। इन टीमों ने रिपोर्ट दी है कि 12,579 घरों में ताले मिले। इन परिवारों के बच्चों को पोलियो ड्राप नहीं पिलाया जा सका। बताया गया कि ये परिवार कुछ दिनों बाद वापस लौटेंगे। इसके अलावा 1369 अन्य मकानों में भी ताले पड़े मिले। इन परिवारों के बारे में बताया गया कि उनके वापस लौटने की कोई मियाद नहीं है। ताला पड़े घरों में सबसे ज्यादा 2142 घर नरैनी क्षेत्र के हैं। बबेरू क्षेत्र में 1913, तिंदवारी क्षेत्र में 1501, जौरही पीएचसी केंद्र में 1263, बांदा सदर क्षेत्र में 1188, कमासिन क्षेत्र में 1099, बिसंडा क्षेत्र में 351, महुआ क्षेत्र में 883, जसपुरा क्षेत्र में 1000 और अतर्रा क्षेत्र में 239 घर शामिल हैं।