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118 नलकूप ठप, नौ हजार हेक्टेयर फसल सूखने का खतरा

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पिपरगवां में बंद पड़ा सरकारी नलकूप। - फोटो : BANDA
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में 118 सरकारी ट्यूबवेल ठप हो जाने से करीब 9 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रबी की खेती सूखने का खतरा मंडरा रहा है। बंद पड़े ट्यूबवेलों में 50 स्थायी रूप से फेल हो चुके हैं। इनके अलावा 68 ट्यूबवेल यांत्रिक/विद्युत गड़बड़ी से बंद हैं। सबसे ज्यादा 66 ट्यूबवेल बांदा जिले के हैं। किसानों के चेहरों पर फसल बचाने के लिए हवाइयां उड़ रही हैं।
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मंडल के चारों जिलों में 1294 नलकूप हैं। इनसे 80,012 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। नलकूपों का रखरखाव सिंचाई विभाग का नलकूप खंड करता है। मंडल की अधिकांशत: खेती ट्यूबवेल पर निर्भर है लेकिन सरकारी ट्यूबवेल के किसी न किसी तकनीकी खराबी से बंद रहना आम बात है। मंडल में इस वर्ष 115 मिलीमीटर बारिश कम हुई है। ऐसे में रबी की फसल में सिंचाई की ज्यादा जरूरत है, लेकिन 118 नलकूप बंद होने से गेहूं, चना, सरसों, मसूर आदि की फसलें सिंचाई के अभाव में सूखने की कगार पर हैं।
पलेवा के लिए खेत को जरूरी है पानी
बांदा। तापमान बढ़ने से गेहूं की बुआई के लिए खेतों में नमी कम हो गई है। पलेवा के लिए किसानों को पानी की सख्त जरूरत है। जनपद में नहरों से 2 लाख हेक्टेयर और राजकीय नलकूपों से 80 हजार से अधिक हेक्टेयर में सिंचाई होती है। निजी नलकूपों पर लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई निर्भर है।
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मंडल में स्थायी व अन्य दोष से बंद पड़े सरकारी नलकूप
जनपद नलकूप स्थाई यांत्रिक/विद्युत
बांदा 681 25 41
चित्रकूट 30 10 03
हमीरपुर 583 15 24
योग 1294 50 68
इस वर्ष नहीं मिले नए नलकूप
दो हजार नलकूप योजना में इस वर्ष चित्रकूटधाम मंडल का पत्ता साफ कर दिया गया। एक भी नलकूप आवंटित नहीं हुआ। पिछले वर्ष 8 नलकूप मिले थे। इनमें बांदा व हमीरपुर को 4-4 नलकूप आवंटित हुए थे। यह सभी छह माह से विद्युत कनेक्शन न होने से शोपीस हैं। नलकूप विभाग का कहना है कि विद्युत विभाग को ऊर्जीकरण के लिए मई माह में 12.50 लाख का बजट भेजा गया है। कनेक्शन के लिए पत्र लिखा गया है।
नलकूपों के रिबोर को नहीं मिला बजट
अधीक्षण अभियंता (नलकूप) दिनेश कुमार मिश्रा का कहना है कि चालू वित्तीय वर्ष में मंडल में स्थाई रूप से खराब नलकूपों के रिबोर के लिए बजट नहीं मिला है। जब कि पिछले वर्ष बांदा में 4 व हमीरपुर में 3 नलकूपों के रिबोर के लिए बजट मिला था। इस वर्ष महज यात्रिंक व विद्युत दोष से खराब होने वाले नलकूपों की मरम्मत का बजट मिला है। जिन्हें अभियान चलाकर ठीक कराया जा रहा है।
नए नलकूपों की क्षमता एक क्यूसिक
अधीक्षक अभियंता ने बताया कि वर्ष 2016 तक नलकूपों की स्थापना डेढ़ क्यूसिक पानी देने की होती थी। लेकिन इसके बाद शासन ने इनकी क्षमता को घटाकर एक क्यूसिक कर दिया है। अब जो नलकूप लगाया जा रहा है वह एक क्यूसिक पानी दे रहा है। पानी की क्षमता कम होने से करीब 5 हजार हेक्टेअर से अधिक कृषि भूमि क्षेत्रफल में किसानों को सिंचाई का नुकसान हुआ है।
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