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रसोई के बजट का नहीं रखा ध्यान

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बांदा। विधान सभा में बृहस्पतिवार को पेश किए गए प्रदेश सरकार के बजट पर गृहिणी, छात्र-छात्राओं, कर्मचारियों और व्यापारियों की अलग-अलग राय है। महिलाओं का कहना है कि बजट में चूल्हा-चौका (किचेन) को राहत नहीं मिली है। बजट के बाद रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम घटने की उम्मीद नहीं है। यह बजट गृहणियों को नहीं भाया है। छात्राओं का कहना है कि वजीफा राशि में वृद्धि और सरलीकरण होना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं किया गया। व्यापारी टैक्स में राहत चाहते हैं। इसका भी कोई प्रावधान नहीं किया गया।
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बीबीए (बैचलर ऑफ बिजनेस एप्लीकेशन) की छात्रा सोनू देवड़ा का कहना है कि बजट में पढ़ाई के अवसर बढ़ाने, वजीफा प्रक्रिया सरल और समयबद्ध तथा सभी को इसका लाभ दिए जाने के लिए कोई बात नहीं कही गई है। बुंदेलखंड की परिस्थितियों के मद्देनजर यहां शिक्षा को ज्यादा से ज्यादा सस्ता, सरल और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए।

गृहिणी रेखा शर्मा की नजर में प्रदेश सरकार का आम बजट महिलाओं के लिए निराशाजनक रहा। चूल्हे चौके का बजट कम होने की उम्मीदों पर पानी फिर गया। घरेलू वस्तुओं की कीमतों पर कमी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई और सस्ती होनी चाहिए। रसोई गैस सब्सिडी की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए।
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कलक्ट्रेट कर्मचारी शाकिर अजीम का कहना है कि केंद्र के बाद अब राज्य सरकार के बजट में भी राज्य कर्मचारियों को कोई खास सौगात या तोहफा नजर नहीं आया। कर्मचारियों और शिक्षकों की सबसे ज्वलंत मांग पुरानी पेंशन बहाली के लिए भी बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया है और न ही कोई कल्याणकारी योजनाएं घोषित की है।

सराफ विभोर ओमर का कहना है कि आम बजट से व्यापारियों को खास राहत नहीं है। प्रदेश सरकार द्वारा वसूले जाने वाले टैक्सों में कोई कमी नहीं की गई। इसका सीधा असर आम आदमी पर भी पड़ता है। व्यापारियों को जीएसटी, आयकर, वाणिज्य कर आदि की जटिल प्रक्रियाओं में और सरलीकरण की सौगात मिलनी चाहिए थी।
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