बांदा। पत्थरों के बीच पानी और मैदानों में वीरानी। प्रकृति ने चित्रकूटधाम मंडल में कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। पत्थरों और पहाड़ों से भरपूर पाठा वाली धर्मनगरी चित्रकूट में भूजल स्तर में हैरतनाक वृद्धि हुई है। यहां मानसून से पहले लगभग तीन मीटर जल स्तर ऊपर आ गया है। दूसरी तरफ मैदानी इलाके और मंडल मुख्यालय बांदा जनपद में मात्र 85 सेंटीमीटर ही भूजल स्तर बढ़ा है।
भूजल विभाग ने बांदा और चित्रकूट जनपदों में मानसून के पहले (प्री-मानसून) जल स्तर की रिपोर्ट दी है। इसमें पिछले वर्ष 2016 और इस वर्ष 2017 के दौरान भूजल स्तर में उतार-चढ़ाव दर्शाया है।
पत्थरों और पहाड़ों से पटे पड़ी पाठा क्षेत्र की धार्मिक नगरी चित्रकूट में इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा 2.89 मीटर भूजल स्तर बढ़ा है। पिछले वर्ष यहां का औसत भूजल स्तर 12.25 मीटर गहराई पर था।
इस वर्ष मानसून के पहले यह चढ़कर 9.36 मीटर पर आ गया। 2.89 मीटर की वृद्धि हुई। सभी पांचों ब्लाकों में जल स्तर बढ़ा है। सबसे ज्यादा 3.28 मीटर जल स्तर पहाड़ी ब्लाक में बढ़ा है।
दूसरी तरफ केन और यमुना जैसी बड़ी नदियों तथा एक दर्जन से ज्यादा छोटी नदियों से भरपूर मैदानी जनपद बांदा में प्री-मानसून जल स्तर सिर्फ 0.85 मीटर ही बढ़ा है। वर्ष 2016 में यहां का जल स्तर 11.70 मीटर गहराई पर था। अबकी वर्ष 2017 में यह 10.85 मीटर पर है।
मात्र 85 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। बबेरू ब्लाक में भूजल स्तर 0.54 सेंटीमीटर और घटा है। अन्य सात ब्लाकों में मामूली वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा 2.51 मीटर भूजल नरैनी ब्लाक में बढ़ा है। दूसरे नंबर पर बड़ोखर खुर्द ब्लाक है जहां 2.10 मीटर की वृद्धि हुई है।
-प्री-मानसून भूजल स्तर में चित्रकूट आगे
-मैदानी बांदा में 85 सेंटीमीटर की वृद्धि
-चित्रकूट में 2.89 मीटर भूजल चढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो