बांदा। जिला पंचायत में अध्यक्ष और एएमए के लिए सरकारी वाहन इनोवा व लक्जरी कार खरीदने के लिए जिला निधि से करीब 21 लाख रुपये निकाल लिए गए। लेकिन वाहन नहीं खरीदे गए और तीन माह बाद यह पैसा निधि में वापस जमा कर दिया गया। जिला पंचायत के वित्तीय परामर्शदाता ने इसे वित्तीय अनियमितता मान मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इसका मूल्यांकन कराकर वसूली की संस्तुति की है।
वाहन खरीद की अनियमितता का खुलासा जिला पंचायत के वित्तीय परामर्शदाता वीके तिवारी द्वारा मार्च 2017 में अभिलेखों की तिमाही जांच पड़ताल में हुआ। यह जांच उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर की थी। परामर्शदाता ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिला पंचायत ने इनोवा खरीदने के लिए 6 जनवरी को 13 लाख 89 हजार 775 रुपये और लक्जरी कार खरीदने के लिए 20 मार्च को 7 लाख 37 हजार रुपये जिला निधि से निकाल लिए।
लेकिन यह राशि संबंधित फर्म को न भेजकर अपने पास रोके रखी गई। तीन माह बाद 30 मार्च को इनोवा के नाम पर निकाला गया पैसा जिला निधि में वापस जमा कर दिया गया। इसी तरह लग्जरी के लिए निकाली गई राशि 29 अप्रैल को वापस जमा कर दी गई।
परामर्शदाता ने कहा है कि इससे जिला पंचायत को आर्थिक क्षति हुई है। यह वित्तीय अनियमितता के तहत आता है। उन्होंने इसका मूल्यांकन निर्धारित कर संबंधित अधिकारी व अध्यक्ष से क्षति की धनराशि की वसूली की कार्रवाई करने की संस्तुति सीडीओ से की है। सीडीओ रामकुमार सिंह ने कहा है कि जांच और मूल्यांकन कराकर अगली कार्रवाई की जाएगी।
-वित्तीय परामर्शदाता ने अभिलेखों के निरीक्षण में पाई खामियां
-3 माह बाद बिना वाहन खरीदे वापस किया पैसा
-सीडीओ को रिपोर्ट भेजकर जांच की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो