बांदा। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार और हॉटकुक्ड वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए अब मातृ समितियों को पुनर्गठित किया जाएगा। केंद्रों में पंजीकृत बच्चों की मां, दादी व नानी ही इसमें सहभागिता निभाएंगी। समिति अध्यक्ष और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री के संयुक्त खाते से हाटकुक्ड समेत आंगनबाड़ी की सभी योजनाओं का संचालन होगा। शासन ने 15 जुलाई तक समितियों का गठन कर जिला कार्यक्रम अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।
गर्भवती महिलाएं, किशोरियों और छह साल तक के बच्चों का कुपोषण दूर करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार हॉटकुक्ड और पोषाहार पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। फिर भी कुपोषितों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। दशक भर पहले योजना को पारदर्शी बनाने के लिए गठित की गई मातृ समितियां पूरी तरह निष्क्रिय हैं।
ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां पोषाहार और हाटकुक्ड के लिए आने वाली धनराशि का बंदरबाट कर लेती हैं। लेकिन सरकार ने फिर मातृ समितियों को सक्रिय करने का फरमान जारी किया है। प्रदेश सरकार की सचिव अनीता सी.मेश्राम ने जिलाधिकारी व जिला कार्यक्रम अधिकारी को जारी किए आदेश में समितियों का पुनर्गठन कर पांच जुलाई तक अनुपालन आख्या मांगी है।
आदेश के मुताबिक इस बार समितियों का स्वरूप बदला होगा। इसमें अध्यक्ष समेत 12 से 15 महिलाएं होंगी। आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत बच्चे की मां, उनकी दादी-नानी, ग्राम पंचायत सदस्य समिति में पदाधिकारी बनेंगी। ये महिलाएं बच्चों के स्वास्थ्य व प्री-स्कूल शिक्षा जैसे कार्यों में भागेदारी करेंगी। अध्यक्ष व सदस्यों का चयन ग्राम प्रधान की उपस्थिति में राजस्व अधिकारियों के सहयोग से मुख्य सेविका करेगी।
मातृ समिति प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से खुलवाएगी और पोषाहार वितरित कराएगी। पोषाहार के स्टॉक की चेकिंग व सत्यापन करेंगे। टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच, प्री-स्कूल कार्यक्रम, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, हौसला पोषण योजना में योगदान देंगी। समिति सदस्यों का रोस्टर तैयार होगा। ताकि प्रत्येक दिन एक-दो सदस्य पोषाहारण वितरण में मौजूद रहें।
हर शनिवार को मातृ समिति की मीटिंग होगी। मुख्य सेविका (सुपरवाइजर) हर दो माह में मातृ समिति की बैठक केंद्र पर करेंगी। समिति सदस्यों को प्रेरित करेंगी। 15 जुलाई तक विशेष अभियान चलाकर राजस्व व खंड विकास अधिकारी के सहयोग से मातृ समितियों का पुनर्गठन कराया जाएगा।
जिला कार्यक्रम अधिकारी इशरत जहां ने कहा कि समितियों को पुनर्गठित करने के लिए सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। गठन की प्रक्रिया कई ब्लॉकों में शुरू हो चुकी है। सचिव के आदेश के मुताबिक 15 जुलाई तक सभी 1700 आंगनबाड़ी केंद्रों पर समितियों का गठन कर उन्हें दायित्व सौंप दिए जाएंगे।
-पंजीकृत बच्चों की मां, दादी-नानी बनेंगी सदस्य
-सचिव ने दिए माह भर में पुनर्गठित करने के निर्देश
-पोषाहार व हॉटकुक्ड वितरण में निभाएंगी सहभागिता
अमर उजाला ब्यूरो