हजरत अली के यौमे विलादत (जन्मदिन) पर बुधवार (13 रजब) की रात छावनी स्थित नियाजी कंपाउंड में तरही मुशायरा हुआ। मेजबान डॉ. साबिर नियाजी ने तिलावत से शुरुआत की।
सैय्यद गौहर रब्बानी ने पढ़ा- रूए अली को तकना इबादत में है शुमार, कितनी बुलंदोबाला जियारत अली की है। इमरान रजा ने सुनाया- ऐ मौत आ रही है तो आ जा न देर कर, पहले मगर बता कि इजाजत अली की है।
जमशेदपुर से आए आफाक निजामी ने कहा कि आफाक विरदे नादे अली सुबहो शाम हो, मुश्किल कुशाई होगी जमानत अली की है। डॉ. खालिद इजहार का शेर था- लिखने लगा जो नादे अली लफ्ज खुद बखुद, आने लगे जुबां पे करामत अली की है। नजरे आलम ने पढ़ा- काफी है हमको जन्नतुल फिरदौस के लिए, आमाल में हमारे जो निस्बत अली की है।
इनके अलावा शायर सैय्यद आमिर मसूदी, सैय्यद रहबर रब्बानी, हसन बांदवी, सरवर रब्बानी, सैय्यद खुश्तर रब्बानी, वाकिफ, जाहिद रब्बानी और मुशायरा आयोजक शोएब नियाजी ने भी शेर सुनाए। निजामत (संचालन) मीर जबलपुरी ने किया।