बांदा। शहर के बेघर व बेसहारा लोगों के लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना और राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत बन रहा ‘आश्रय गृह’ दो सालों में सिर्फ 35 फीसदी बन सका। लगभग दो करोड़ की लागत वाले इस गृह में अब तक साढ़े 76 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उधर, आश्रय गृहों में गुणवत्तापरक सुविधाओं के लिए उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देकर विशेष सचिव ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।
नगर विकास अभिकरण के मुताबिक हरदौली स्थित कांशीराम कालोनी के नजदीक 50 लोगों की क्षमता वाला आश्रय गृह निर्माणाधीन है। इसकी लागत एक करोड़ 93 लाख 49 हजार रुपये है। तत्कालीन सपा सरकार ने 2015 में कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज, उत्तर प्रदेश जल निगम (सीएनडीएस) को निर्माण के लिए 77 लाख 40 हजार रुपये जारी किए थे। कार्यदाई संस्था ने 76 लाख 51 हजार रुपये अब तक खर्च कर डाले और निर्माण सिर्फ 40 फीसदी हुआ।
उधर, मिशन के विशेष सचिव (उत्तर प्रदेश शासन) रमाकांत पांडेय ने जिलाधिकारी को पत्र जारी कर उच्च न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए आश्रय गृह में उच्चस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। कहा है कि अस्थाई व स्थाई आश्रय गृहों में अग्निशमन उपकरण, शौचालय, गैस कनेक्शन, मच्छरों के लिए उपकरण, बच्चों की देखभाल के लिए आंगनबाड़ी समन्वयक, लॉकर, मनोरंजन के साधन, सीसीटीवी कैमरे, शिकायती रजिस्टर, गुणवत्तायुक्त प्रकाश व्यवस्था आदि जरूरी हैं। शुल्क के लिए प्रबंध समिति गठन के भी निर्देश दिए हैं।
-‘आश्रय गृह’ दो सालों में सिर्फ 35 फीसदी ही बन सका
-दो करोड़ की ‘आश्रय गृह’ योजना में खर्च हो गए 76 लाख
-विशेष सचिव ने गुणवत्ता परक सुविधाओं के दिए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो